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रिपोर्ट - रंजीत तिवारी
गला घोटकर हुई थी निर्मम हत्या, डॉक्टर ने की थी पुष्टि फिर भी 2 साल से कातिलों पर मेहरबान है पुलिस
इटियाथोक/गोण्डा :-- कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन गोण्डा जिले की इटियाथोक पुलिस के हाथ इतने छोटे क्यों पड़ गए कि 2 साल पहले हुई एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री की निर्मम हत्या का पर्दाफाश तक नहीं कर पाई? मामला रमगड़िया गांव का है, जहां पोस्टमार्टम रिपोर्ट चीख-चीख कर कह रही है कि महिला को गला दबाकर मारा गया, FIR में 3 हत्यारे नामजद हैं, फिर भी 2 साल से इटियाथोक थाने की पुलिस हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी है पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए दर-दर की भटक रहा है और हत्यारे सीना तानकर गांव में बेलगाम घूम रहे हैं।
मामला 25 जुलाई 2024 दोपहर के 2 बजे का है। क्षेत्र के रमगड़िया गांव की प्रमिला देवी शौच के लिए गांव के बाहर दुर्गा प्रसाद के गन्ने के खेत में गई हुई थी। पहले से घात लगाए बैठे दरिंदों ने उसे अकेला पाकर दबोच लिया। पहले जमकर पीटा, फिर गला घोंटकर उसकी सांसें छीन ली। चीख-पुकार सुनकर जब तक लोग पहुंचे, हत्यारे खेतों के रास्ते फरार हो चुके थे। उसी दिन थाना इटियाथोक में हत्या की FIR No. 0286/2024 दर्ज हुई। परिवार को लगा था कि अब इंसाफ मिलेगा, लेकिन अब तक इंसाफ की जगह सिर्फ इंतजार मिला है।
इस हत्याकांड की सबसे बड़ी कड़ी यह है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने साफ-साफ लिखा है कि मौत गला दबाने (Throttling) से हुई है। मतलब यह हादसा नहीं, सोची-समझी साजिश के तहत किया गया कत्ल है। जब सबूत इतना पक्का है, तो फिर गिरफ्तारी क्यों नहीं?
इस केस में पुलिस की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध है। सूत्र बताते हैं कि इटियाथोक पुलिस एक व्यक्ति को इस हत्याकांड का मुख्य संदिग्ध मानती है। उसे कई बार थाने बुलाया गया, घंटों तक बंद कमरे में पूछताछ हुई, लेकिन हर बार उसे मेहमान की तरह चाय पिलाकर छोड़ दिया गया। आखिर ऐसा क्या है जो पुलिस संदिग्ध को पकड़कर भी छोड़ देती है? क्या थाने से ही सौदेबाजी तो नहीं हो रही है?
पीड़ित पति देव प्रकाश तिवारी का आरोप है कि 2 साल से वह थाने के चक्कर काट-काट कर थक चुका है। SP कार्यालय तक गुहार लगा चुका है। लेकिन थाना अध्यक्ष इटियाथोक ने इस हत्या की फाइल को कूड़ेदान में डाल दिया है। न चार्जशीट, न गिरफ्तारी, न खुलासा।
सवाल सीधा है - जब पोस्टमार्टम में कत्ल साबित है, तीन लोग नामजद हैं, संदिग्ध से बार-बार पूछताछ हो रही है, तो फिर 2 साल से इटियाथोक पुलिस इस केस को क्यों लटका रही है? क्या कोटेदारी की रंजिश वाले इस हत्याकांड में थाने की भी कोई रंजिश छुपी है?

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