एससी एसटी एक्ट का दुरुपयोग: न्याय का हथियार या निर्दोषों को फंसाने का औजार ?

 

               श्री अवध डाटकाम    9839627223

रंजीत तिवारी 

 संविधान निर्माताओं ने SC-ST एक्ट इसलिए बनाया था ताकि समाज के सबसे कमजोर वर्ग को सुरक्षा और न्याय मिल सके। इस कानून की मंशा पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन सवाल इसकी जमीनी हकीकत पर है। आज यह कानून कई जगह न्याय का हथियार कम और निर्दोष लोगों को फंसाने, डराने और ब्लैकमेल करने का औजार ज्यादा बनता जा रहा है। मैं एक पत्रकार होने के नाते रोज ऐसे मामले देख रहा हूँ। इटियाथोक, गोंडा में ही नहीं, पूरे प्रदेश में छोटा सा जमीन का विवाद हो, आपसी कहासुनी हो या चुनावी रंजिश हो, तुरंत SC-ST एक्ट की धारा लगा दी जाती है।

सच्चाई जाने बिना ही FIR दर्ज हो जाती है और सवर्ण समाज के लोगों को, जिसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य ही नहीं बल्कि हर सामान्य वर्ग के लोग शामिल हैं, थाने से लेकर कोर्ट तक के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसका सबसे बड़ा दुख यह है कि जब जांच में मामला झूठा निकलता भी है, तब तक पीड़ित परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा, समय और पैसा सब बर्बाद हो चुका होता है, लेकिन झूठी शिकायत करने वाले पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। क्या यही संविधान का सम्मान है? अगर दलित को गाली देना अपराध है तो सवर्णों को झूठे केस में फंसाना कौन सा न्याय है? संविधान तो सभी को बराबर सुरक्षा देने की बात करता है।

मैं सरकार से मांग करता हूँ कि SC-ST एक्ट में FIR से पहले अनिवार्य निष्पक्ष जांच हो, झूठी शिकायत साबित होने पर शिकायतकर्ता पर भी सख्त कार्रवाई हो और इस कानून का पैसों के लिए दुरुपयोग करने वालों को रोका जाए।

यह लड़ाई किसी जाति के खिलाफ नहीं, बल्कि झूठ और फरेब के खिलाफ है, ताकि संविधान का असली सम्मान बना रहे और किसी भी निर्दोष के साथ अन्याय न हो।

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