श्री अवध डाटकाम 9839627223
अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग में दोनों प्रतिद्वंद्वी देशों के अलावा यदि किसी तीसरे देश को क्षति पहुंची है तो वह है भारत , और क्षति पहुंचाने वाला कोई और नहीं बल्कि भारत का अपना नया नवेला दोस्त हैं। अमेरिका और ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में किए गए हवाई हमले एक के बाद एक करके तीन भारतीय जहाज नष्ट हो चुके हैं। अपने द्वारा किए जाने वाले इस अनैतिक हमले की जानकारी भी स्वयं अमेरिका ही देता है। दो क्रूड आयल भरें जहाज को डुबोने के बाद पिछले दिनों एक भारतीय मछुआरों के जहाज पर हिल फायर मिसाइल से हमला कर दिया जिसमें तीन मछुआरे अकारण मारें गए। मिशाइल हमले से जलते जहाज में सवार अन्य मछुआरों की सुरक्षा के ओमान सेना सक्रिय हुई और लोगों को बचाया।
अफसोस की बात यह है कि हमारा नया साथी हमें इतनी क्षति पहुंचा रहा है और हम एक शब्द बोलने से कतरा रहे हैं। आखिर भारत की क्या मजबूरी है कि भारत अमेरिका से इन हमलों के बारे में एक भी शब्द नहीं बोल पा रहा है।भारत के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री किसी ने भी अमेरिका से इन हमलों को लेकर कोई वार्ता नहीं किया। अब सवाल यह उठता है कि क्या हमें अमेरिका के हर जुर्म को सहर्ष स्वीकार करना होगा ?
अमेरिका खुद एक प्रेस वार्ता करके भारतीय मछुआरों के जहाज पर हवाई हमले की जिम्मेदारी लेता है लेकिन भारत का कोई भी जिम्मेदार अमेरिका से इस विषय पर कोई प्रश्न नहीं पूछा। भारत सरकार की इस चुप्पी ने देश की जनता एवं संप्रभुता को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं ।

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