सुजानगंज/जौनपुर :-- जब तक हिन्दू समाज जाति में बंटा रहेगा तब तक समाज में तरह तरह की समस्या आती रहेगी। समाजिक समस्याओं का स्थाई समाधान हिन्दू समाज का संगठित होना है।जब हम एक रहेंगे तो हमें कोई बाहरी ताकत छूं नहीं सकती। उक्त उद्गार क्षेत्र के नरहरपुर गांव में सकल हिंदू समाज द्वारा आयोजित हिंदू सम्मेलन में संघ के जिला प्रचारक राजेंद्र प्रथम ने व्यक्त किया। आगे कहा कि सन 1925 की विजयादशमी को शुरू हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी स्थापना की 100 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं।संघ आज विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन बन गया है, इसलिए स्वाभाविक ही संघ को जानने की उत्सुकता समाज में बढ़ी है संघ को जानना है तो संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार जी को जानना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि डॉक्टर हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे। स्वाधीनता आंदोलन में वे सक्रिय थे इसलिए दो बार जेल भी गए थे। संघ की स्थापना ऐसे समय में हुई,जब हमारा देश स्वाधीनता के लिए संघर्ष कर रहा था। डॉक्टर हेडगेवार का स्पष्ट मत था कि राष्ट्र की स्वतंत्रता, उसके पश्चात परम वैभव की प्राप्ति तथा समाज की विविध समस्याओं का स्थायी समाधान केवल हिंदू समाज के संगठित होने से ही होगा। उन्होंने जाति भाषा वेशभूषा प्रांत आदि विविधताओं को ही भेद मानकर असंगठित हुए हिंदू समाज को हिंदुत्व के आधार पर संगठित करने का विचार कर संघ की स्थापना की।अपने यहां हिंदुत्व कोई उपासना पद्धति या रिलिजन नहीं है,यह जीवन दृष्टि है और उस दृष्टि के आधार पर विकसित हुई जीवन पद्धति है। संघ यानी शाखा, इसी कार्य पद्धति के कारण जो स्वयंसेवक निर्माण हुए उनके आचरण के कारण संघ की समाज जीवन में सकारात्मक छवि बनी है। संघ यानि देशभक्ति, निस्वार्थ सेवा,अनुशासन,यह परिचय समाज के मन में स्थापित हुआ है। किसी भी श्रेष्ठ कार्य को उपवास, उपेक्षा,विरोध और फिर स्वीकार्यता के चरणों से गुजरना पड़ता है,वैसे ही संघ को भी इन सभी चरणों से गुजरना पड़ा। आज संघ का कार्य कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से अरुणाचल प्रदेश तक भारत के हर कोने तक पहुंच गया है। देशभक्ति से ओत - प्रोत स्वयंसेवक समाज के कष्ट देखते ही दौड़ पड़ते हैं, तभी आज किसी भी प्राकृतिक अथवा अन्य आपदाओं के समय वहां तुरंत पहुंच जाते हैं।केवल आपदा के समय ही नहीं नियमित रूप से समाज में दिखने वाले अभाव,पीड़ा,उपेक्षा हल करने हेतु स्वयंसेवक अपनी क्षमता अनुसार सर्वत्र प्रयास करते हैं। आज संघ के स्वयंसेवक समाज के सहयोग से स्वास्थ्य,शिक्षा,संस्कार और स्वावलंबन के विषय में ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में सेवाकार्य और अपना गतिविधियां चला रहे हैं। वैसे तो स्वयंसेवक नियमित रूप से समाज परिवर्तन और समस्याओं का समाधान करने के लिए सतत् सक्रिय रहते हैं, लेकिन शताब्दी वर्ष के पश्चात पांच विषयों पर सज्जन शक्ति के सहयोग से जन जागरण के लिए प्रयत्न करेंगे जिन्हें पंच परिवर्तन कहा गया। इसके पूर्व कथावाचक विनोद शुक्ला ने देश में हो रहे धर्मांतरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदू समाज को जागृत कर संगठित करने से ही इसका निदान संभव है। आचार्या सरोजा देवी गौतम ने भी संबोधित किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता अशोक कुमार सरोज संचालन तरुण जी ने आभार सुशील गिरी ने ज्ञापित किया। तीर्थराज गिरी अवधेश यादव आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।


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