बुद्ध चरित्र कथा की अमृत वर्षा: तीन दिवसीय प्रवचन संपन्न


 सद्धर्माचार्य भिक्षु प्रियदर्शी थेरो ने कहा – जिसे हम सुख समझते हैं, वह भी दुख है

रिपोर्ट - प्रभात सिंह 

बरसठी / जौनपुर| क्षेत्र के बेलौना कला (बबुरी गांव) में आयोजित तीन दिवसीय भगवान बुद्ध चरित्र कथा की अमृत वर्षा का समापन सोमवार को श्रद्धा और आध्यात्मिक माहौल में हुआ। समापन दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिसने बौद्ध वाणी के संदेशों को आत्मसात किया।

मुख्य वक्ता पूज्य सद्धर्माचार्य भिक्षु प्रियदर्शी थेरो, प्रख्यात बौद्ध धर्म प्रचारक एवं विद्वान ने भगवान बुद्ध के जीवन चरित्र, उपदेशों और मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि जिसे हम सुख समझते हैं, वह भी दुख है; क्योंकि वह स्थायी नहीं है। वास्तविक सुख तो मन की शांति में है, न कि भौतिक वस्तुओं में। उन्होंने बताया कि बुद्ध का मार्ग अहिंसा, करुणा और सत्य पर आधारित है जो मानवता को आंतरिक शांति और आत्मबोध की दिशा देता है। पूज्य भन्ते मेत्तानन्द ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि बुद्ध के विचार आज भी समाज को नई दिशा देने में समर्थ हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में करुणा, धैर्य और सद्भाव को स्थान दें तथा समाज में शांति और भाईचारे का संदेश फैलाएं। इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद, प्रधान भुआल विश्वकर्मा, शिक्षक अरुण यादव, लालचंद्र यादव, सेवालाल गौतम, हरेंद्र गौतम, इंद्रभान व डॉ. प्रेमचंद्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर विश्व कल्याण एवं शांति के लिए प्रार्थना के हुआ।

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