सुजानगंज / जौनपुर :- मानव शरीर मिलने के बाद जीव मायाजाल में फंस जाता है। मनुष्य जब विपत्ति में होता है तभी भगवान को याद करता है उक्त बातें क्षेत्र के असरोपुर में ग्राम प्रधान धीरज चौबे के आवास पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के में कथा व्यास श्री वरुण मिश्र जी ने कहा।
कथा में आगे महाभारत काल का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब अश्वत्थामा ने पांडवों पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया, तब भगवान श्रीहरि ने अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में प्रवेश कर उनके पुत्र की रक्षा की। महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद जब श्रीकृष्ण द्वारिका लौट रहे थे, तब उन्होंने पांडवों और कुंती से इच्छा पूछी। सभी ने अपनी इच्छाएं बताईं, लेकिन कुंती ने मांगा कि उन्हें हमेशा विपत्तियां मिलें, ताकि भगवान श्रीकृष्ण उनके साथ रहें और उन्हें उनके दर्शन होते रहें।
कथा व्यास ने आगे बताया कि श्रीकृष्ण के परम धाम गमन के बाद जब अर्जुन पटरानियों को लेकर अपने राज्य लौट रहे थे, तब कोल भीलों ने उन पर आक्रमण कर उन्हें परास्त कर दिया और सब कुछ छीन लिया। श्री मिश्र ने कहा कि जब तक ईश्वर की क्षत्रछाया आपके साथ है, तभी तक आप विजेता बन सकते हैं।इस सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा प्रारम्भ के पूर्व मुख्य यजमान हरिशंकर चौबे व वंदना देवी ने कथा व्यास का माल्यार्पण कर पूजन किया।कथा विश्राम पर कार्यक्रम में उपस्थित सभी कथा प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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