रिपोर्ट - पंकज गुप्ता
सूरापुर / सुल्तानपुर :-- श्री हनुमत रामलीला समिति भवानीपुर के तत्वावधान में चल रही रामलीला के तीसरे दिन मंचन में भक्तिभाव और नाट्यकला का अनुपम संगम देखने को मिला। मीना बाजार, पुष्प वाटिका, रावण-बाणासुर संवाद, परशुराम-लक्ष्मण संवाद और सीता स्वयंवर जैसे आकर्षक प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। मंच पर कलाकारों के जीवंत अभिनय और संवादों ने ऐसा वातावरण बनाया कि पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के जयकारों से गूंज उठा।
रामलीला का शुभारंभ मीना बाजार प्रसंग से हुआ, जिसमें अयोध्या के राजकुमारों का स्वागत जनकपुरी में बड़े हर्षोल्लास के साथ किया गया। मंच सज्जा, परिधान और संवादों ने इस दृश्य को जीवंत बना दिया। इसके बाद प्रस्तुत पुष्प वाटिका प्रसंग में जब भगवान श्रीराम ने पुष्प तोड़ते हुए माता सीता के दर्शन किए, उस क्षण का अभिनय अत्यंत भावपूर्ण रहा। पुष्पों की सजावट, मधुर संगीत और भावनात्मक संवादों ने भक्तों को भावविह्वल कर दिया।
इसके पश्चात रावण-बाणासुर संवाद का मंचन हुआ, जिसमें रावण के अहंकार और बाणासुर के पराक्रम का प्रभावशाली चित्रण किया गया। दोनों पात्रों के तीखे संवादों ने यह संदेश दिया कि अहंकार अंततः विनाश का कारण बनता है। परशुराम-लक्ष्मण संवाद के दौरान दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से मंचन का स्वागत किया। भगवान परशुराम के तेज और लक्ष्मण के साहसपूर्ण उत्तरों ने मंच पर वीरता और मर्यादा दोनों का सुंदर संगम प्रस्तुत किया। सबसे प्रतीक्षित प्रसंग सीता स्वयंवर रहा। जब भगवान श्रीराम ने शिवजी का धनुष उठाकर भंग किया, तो पूरा परिसर “जय श्रीराम” के नारों से गूंज उठा। इस अद्भुत दृश्य ने रामलीला को अपने भक्तिमय चरम पर पहुंचा दिया।
इस अवसर पर सभी पात्रों ने अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया —
भगवान श्रीराम की भूमिका शिवा अग्रहरि ने निभाई, जिनका शांत और मर्यादित अभिनय दर्शकों को भाया।लक्ष्मण के रूप में प्रांशु अग्रहरि का उत्साह और संवाद अद्भुत रहे।राजा जनक की भूमिका में भोला नाथ अग्रहरि ने अपनी गरिमा से सबका दिल जीता।
महर्षि विश्वामित्र की भूमिका जयकृष्ण पांडेय ने गंभीरता और तेजस्विता के साथ निभाई।भगवान परशुराम बने शिवम् अग्रहरि, जिन्होंने मंच पर अद्भुत प्रभाव छोड़ा।
रावण की भूमिका श्रवण कुमार बरनवाल ने इतनी सशक्तता से निभाई कि दर्शक वाह-वाह कर उठे।वहीं बाणासुर के रूप में बालकृष्ण बरनवाल का अभिनय भी प्रभावशाली रहा।कार्यक्रम संचालन जयप्रकाश अग्रहरि द्वारा किया गया, जबकि मंच संचालन की जिम्मेदारी सुरेश गुप्ता ने निभाई भोलानाथ अग्रहरि ने व्यवस्था प्रमुख के रूप में पूरे आयोजन की देखरेख की अतिथियों का सम्मान प्रेम प्रकाश जायसवाल जी और शैलेश कुमार गुप्ता ने किया जिनकी ओजस्वी शैली और सटीक संवादों ने पूरे मंचन को जीवंत बना दिया।
समिति के पदाधिकारियों ने पूरे आयोजन की व्यवस्था और अनुशासन का उत्कृष्ट निर्वहन किया। दर्शकों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मंचन का आनंद लिया और हर प्रसंग पर तालियों से कलाकारों का मनोबल बढ़ाया।

0 Comments