मजाक को मजाक ही रहने दो,तो ही अच्छा है,

इसे हकीकत न बनाओ, तो ही अच्छा है,

मिट जाएगी तेरी ये बसी बसाईं बस्ती,

इस बुझदिल में शेर न जगाओ तो ही अच्छा है.......1


जिस महफ़िल में टहल रहे हो तुम मारूफ बनकर,

वहा हमें न बुलाओ तो ही अच्छा है,

जिनकी सरपरस्ती में जी रहे हो तुम, 

तारुफ़ न हो मेरा उनसे, तो ही अच्छा है..........2

तबाह हो जायेगा तेरा ये मर्तबा सबकुछ,

मेरी अस्ल न लाओ, तो ही अच्छा है.

हम पागल है, हमें पागल ही रहने दो,

हमें शरीफ ना बनाओ तो ही अच्छा है............ 3


जितना है तेरे पास हम उतना छोड़ आये है, 

हमें मुफलिस ही समझो तो ही अच्छा है..

शौक नहीं है हमें फिर से मशहूर होने की,

हमें गुमनाम ही रहने दो, तो ही अच्छा है.............4


ख़तम कर देगी मेरी मौजूदगी ही तेरी अस्मत को,

हमें अपने महफिल में ही, न बुलाओ तो ही अच्छा है.

हम चलते है खामोशी से अब इस शहर से

, हम रूबरू न हो फिर से, तो ही अच्छा है......... 5



शरद श्रीवास्तव

 "राही, "