पैसों ने दिखा दिए थे शहर के रास्ते वरना गांव की पगडंडियां तो आज भी अच्छे हैं,
लोग शहरों में ढूंढ रहे हैं सूट वाला अध्यापक, लेकिन गांव के गुरुजी तो अभी भी सच्चे हैं,
लाइब्रेरी में बैठे-बैठे ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है,
ऑफलाइन अध्यापक की ना कोई सुनवाई हो रही है....
कुछ इस तरह से लाइब्रेरी का खुमार चढ़ गया है
स्कूल के नाम पर पिंटू को बुखार चढ़ गया है...
कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं फिर
भी ये अच्छे हैं .
पैसों ने दिखा दिए थे शहर के रास्ते वरना गांव की पगडंडीयां तो अभी भी अच्छे हैं...... 2
चल गया है फैशन ऑनलाइन क्लास की,
फिक्र कहां रह गया युवाओं को फेल और पास की,
चल रही है बात नेटवर्क की क्लास में,
कौन बैठेगा कल देखो अपने पास में
खो रहा है लोक लज्जा आधुनिकता की आड़ में,
मस्त है बच्चे अपनी मस्ती में, बाप जाए भाड़ में...
सीख रही है दुनिया अब ये बाप से बेहतर बच्चे हैं.
पैसों ने दिखा दिया रास्ता शहरों का वरना गांव के पगडंडियां अब भी अच्छे हैं........ 3
जिसने है उसे बढ़ा बनाया उसे ही छोटा बना रहा,
बेटा बाप के ही सामने देखो हुक्का चढ़ा रहा,
मां सशक्ति कोने में बेटी लिपस्टिक लगा रही,
सांस मर रही खाने को, बहु भंडारे चलवा रही,
कुत्ता पाल रहा इंसान जो जानवर के बच्चे हैं, राही सच है अब तो यह, ये इंसानों से अच्छे हैं
पैसो ने दिखा दिए शहर के रास्ते वरना गांव पग डंडिया अब भी अच्छे हैं ।............. 4
शरद श्रीवास्तव राही

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