यूएन द्वारा प्रतिबंधित आतंकी का बेटा है पाक सेना का डीजी आईएसपीआर

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पाक सेना और आतंकियों के रिश्ते हुए सार्वजनिक, आतंकियों के जनाजे में पढ़ा फातिया 

इस्लामाबाद. पाक सेना का दोहरा चेहरा लोगों के सामने स्पष्ट दिखाई देने लगा है। पाक सेना का हर शीर्ष अधिकारी किसी न किसी आतंकी का रिश्तेदार है। भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर ने एक-एक कर दुनिया के सामने उजागर करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के चेहरे पर से पहला मुखौटा तब उठा, जब आतंकियों के जनाजे में पाक सेना के तमाम अफसर फातिहा पढ़ते नजर आए। कब्रस्तिन से सामने आई तस्वीरों ने पूरी दुनिया को बता दिया कि पाकिस्तानी सेना और आतंकियों के बीच कितना गहरा रिश्ता है।

आज पाक सेना और आतंकियों के बीच का एक नया रिश्ता उजागर हुआ है. यह रिश्ता पूरी दुनिया को चीख-चीख कर बता रहा है कि पाकिस्तानी सेना और आतंकियों के बीच संबंध सिर्फ दोस्ताना ही नहीं है, बल्कि आतंकियों के परिजनों को पाकिस्तानी सेना के ऊंचे ओहदों पर बैठा कर रखा गया है. एक ऐसा ही खुलासा पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अहमद शरीफ चौधरी को लेकर हुआ है

मेजर जनरल अहमद शरीफ चौधरी पाक सेना का मुख्य प्रवक्ता होने के साथ-साथ इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस का महानिदेशक भी है. जिसे सामान्य बोलचाल में डीजी- आईएसपीआर कहा जाता है।अहमद शरीफ चौधरी का काम पाक सेना के फैसलों और नीतियों को दुनिया के सामने रखना है।आपको यह जानकर हैरानी होगी कि पाकिस्तानी सेना के इतने अहम पद पर बैठे अफसर का संबंध आतंकी परिवार से है।बताया जा रहा है कि डीजी- आईएसपीआर अहमद शरीफ चौधरी के पिता का नाम सुल्तान बशीरुद्दीन महमूद है. यह वही सुल्तान बशीरुद्दीन महमूद है, जिसे यूनाइटेड नेशन्स ने वैश्विक आतंकी घोषित किया हुआ है. परमाणु वैज्ञानिक से आतंकी तक का सफर तय करने वाला सुल्तान बशीरुद्दीन महमूद ने 1999 में महमूद ने उम्माह तमीर-ए-नौ (यूटीएन) नाम का एक इस्लामिक संगठन बनाया था. यह संगठन आतंकी गतिविधियों में शामिल था.


यूटीएन की गतिविधियों को देखते हुए साल 2001 में अमेरिका ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया और आतंकी संगठन घोषित कर दिया था. इसके बाद, दिसंबर 2001 में यूनाइटेड नेशन की अल-कायदा प्रतिबंध समिति ने बशीरुद्दीन महमूद को आतंकी सूची में शामिल किया था. इसके अलावा, अमेरिका के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने उसे खास तौर पर ग्लोबल टेरेरिस्ट घोषित कर दिया था. ओएफएसी ने उसका पता भी अल-कायदा के काबुल स्थित एक सुरक्षित ठिकाने के तौर पर दर्ज किया.

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