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वाराणसी /उत्तर प्रदेश -- अपना अपना होता है यह बात वाराणसी में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है जहां शायद एक दांगदार दरोगा को बचाने के लिए पुलिस महकमे ने उसके खिलाफ चार्जशीट ही नहीं दाखिल किया जिसके कारण 42.50 लाख की लूट का आरोपी दरोगा जेल से बाहर आ गया है और अब अपने निर्दोष होने का उपक्रम बना रहा है।जी हां हम बात कर रहे हैं वाराणसी के दरोगा सूर्य प्रकाश पांडे की जिस पर वर्दी की आड़ में 42.50 लाख रुपये की लूट को अंजाम देने का आरोप है। पिछले साल हाईवे पर सराफा कारोबारी के कर्मचारियों से नकली क्राइम ब्रांच बनकर लूट करने वाला यह दरोगा अब जेल से बाहर है। गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज होने के बावजूद कमजोर पैरवी और समय पर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण उसे जमानत मिल गई है। सूर्य प्रकाश के ऊपर कानून के रक्षक की वर्दी पहन कर अपराध करने का आरोप है फिर भी पेशी के दौरान दांगी दरोगा हंसता हुआ नजर आया।जैसे अपराध उसके लिए मजाक हो। निचली अदालत से जमानत खारिज होने के बाद हाईकोर्ट से उसे राहत मिली। अब वह आजाद हो चुका है और अपने को निर्दोष साबित करने का प्रयास कर रहा है।
इस पूरे मामले ने वाराणसी पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब कानून के रक्षक ही अपराधी बन जाएं, तो आम जनता का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है। सूर्य प्रकाश की कहानी सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरियों का आईना है, जो पुलिस महकमे की कार्यशैली को समाज के दिखा रहा है।

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