हृदयगति रुकने से टीएनटी गुरुजी का निधन, शिक्षा जगत में छाया मातम--

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रिपोर्ट - लाल चंद्र निषाद 

40 वर्षों तक ज्ञान की अलख जगाने वाले गुरुजी विद्यालय खोलने का सपना रह गया अधूरा

सुजानगंज/जौनपुर :--  शिक्षा के क्षेत्र में चार दशकों तक ज्ञान की ज्योति जलाने वाले फरीदाबाद ग्राम सभा के पूरा कोदई गांव निवासी त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी (टीएनटी) गुरुजी के निधन से शिक्षा जगत सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन की खबर से हर आंख नम हो गई और उनके चाहने वालों के बीच गहरा सन्नाटा छा गया।

जानकारी के अनुसार रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुजानगंज लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हृदयगति रुकने से उनके निधन की खबर मिलते ही गांव और क्षेत्र में मातम छा गया। सुबह उनकी अंतिम यात्रा में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। शिष्यों, शुभचिंतकों और क्षेत्रवासियों ने नम आंखों से अपने प्रिय गुरुजी को अंतिम विदाई दी। उनका अंतिम संस्कार प्रयागराज के छतनाग घाट पर किया गया। वह अपने पीछे तीन बेटों सहित हरा भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

टीएनटी गुरुजी केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के भविष्य के निर्माता थे। विगत 40 वर्षों से वह बच्चों को जवाहर नवोदय विद्यालय सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते आ रहे थे। उनके मार्गदर्शन में पढ़े कई दर्जन विद्यार्थी आज विभिन्न उच्च पदों पर रहकर देश और समाज की सेवा कर रहे हैं।

उनकी पहचान केवल एक शिक्षक के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे मार्गदर्शक के रूप में थी, जिन्होंने अपने ज्ञान, अनुशासन और समर्पण से अनेक परिवारों के सपनों को साकार किया। विद्यार्थियों के बीच वह टीएनटी गुरुजी के नाम से विशेष रूप से प्रसिद्ध थे।

अधूरा रह गया सुजानगंज में वृहद विद्यालय खोलने का सपना 

टीएनटी गुरुजी का सपना था कि सुजानगंज क्षेत्र में एक वृहद विद्यालय की स्थापना हो, जहां ग्रामीण अंचल के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर मिल सके। वह शिक्षा के माध्यम से ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ते देखना चाहते थे, लेकिन नियति ने उन्हें यह सपना पूरा करने का अवसर नहीं दिया। उनके निधन से क्षेत्र ने एक समर्पित शिक्षक, मार्गदर्शक और शिक्षा के सच्चे साधक को खो दिया है। उनके द्वारा शिक्षित विद्यार्थी ही उनकी सबसे बड़ी विरासत हैं। उनके पढ़ाए हुए बच्चों की सफलता और उनके जीवन में जगाई गई ज्ञान की ज्योति सदैव उनकी स्मृतियों को जीवित रखेगी।


टीएनटी गुरुजी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके ज्ञान, संस्कार और शिक्षा से रोशन हुए हजारों जीवन उनकी अमर कहानी कहते रहेंगे।

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