करूवापारा में रामलीला के पंचम दिवस पर वन गमन और केवट संवाद की लीला देख दर्शक हुए भावुक

         श्री अवध डाटकाम    9839627223

 रिपोर्ट - रंजीत तिवारी 

इटियाथोक/गोण्डा :--  श्री रामलीला प्रबंध समिति करूवापारा द्वारा आयोजित 64वें वर्ष के रामलीला मंचन के पंचम दिवस पर प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी से लेकर वन गमन, केवट संवाद एवं महाराज दशरथ के मरण तक के अत्यंत भावपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया गया, जिसे देख दर्शक भावुक हो गए।

श्री राम लीला मंच पर अयोध्या में श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी , मंथरा के बहकावे में आकर कैकेई द्वारा कोपभवन में जाकर महाराज दशरथ से दो वरदान मांगना, जिसमें पहला भरत का राज्याभिषेक और दूसरा श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास का वरदान सुनकर महाराज दशरथ व्याकुल होने का सजीव मंचन हुआ।लेकिन वचनबद्धता की विवशता के कारण श्रीराम ने पिता की आज्ञा को सहर्ष स्वीकार कर लिया। माता सीता और लक्ष्मण जी भी उनके साथ वन जाने को तैयार हो गए। त्याग और आज्ञापालन का यह दृश्य देख पंडाल में मौजूद सैकड़ों दर्शकों की आंखें नम हो गईं।

इसके बाद सुमंत जी को दशरथ ने राम को वापस लाने भेजा, लेकिन प्रभु वन की ओर बढ़ गए। वन यात्रा के दौरान निषादराज से भेंट और गंगा तट पर केवट द्वारा प्रभु को गंगा पार कराने के प्रसंग ने भक्ति रस से भर दिया। इसके बाद प्रभु ने महर्षि भारद्वाज और महर्षि वाल्मीकि से भेंट कर चित्रकूट में पर्णकुटी बनाकर निवास शुरू किया।

मंच पर प्रभु श्रीराम - प्रभात पांडेय, लक्ष्मण - आकाश तिवारी, महाराज दशरथ - लवकुश तिवारी, महर्षि वशिष्ठ/भारद्वाज - धनलाल मिश्रा, सुमंत जी - सुधीर तिवारी, भंगी - राम गोपाल पांडेय, महर्षि वाल्मीकि - आनंद प्रकाश ओझा के अलावा श्रीराम द्विवेदी, चंदन पांडेय, मानिक राम पांडेय ने सहयोगी भूमिका निभाई।

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