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रिपोर्ट - प्रभात सिंह
बरसठी /जौनपुर :- प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्य घर योजना के तहत बिजली बिल से राहत का सपना देखने वाले एक गरीब ग्रामीण की छत आज भी खाली है, लेकिन उसके नाम पर 1.38 लाख 600 रुपये का कर्ज दर्ज हो चुका है और आवेदक परेशान हैं। आरोप है कि सोलर पैनल लगाने के नाम पर रुपये जमा कराए गए, बैंक से ऋण भी स्वीकृत करा दिया गया, लेकिन एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी घर पर सोलर प्लांट नहीं लगाया गया।
क्षेत्र के सरसरा गांव के हरिशंकर गुप्ता ने योजना के तहत गंभीर अनियमितता का आरोप लगाया है। बरसठी ब्लॉक मुख्यालय के सामने गुमटी में दाना भूनकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले हरिशंकर का कहना है कि बिजली खर्च कम करने की उम्मीद में उन्होंने तीन किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगवाने के लिए कना ट्रेडिंग नामक वेंडर के माध्यम से आवेदन कराया था। आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान उनके खाते से 22 हजार रुपये ट्रेंडिंग फर्म में जमा कराए गए। इसके बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से उनके नाम पर 1 लाख 38 हजार 600 रुपये का ऋण भी स्वीकृत हो गया। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि जल्द ही घर पर सोलर प्लांट लगा दिया जाएगा, लेकिन अब तक छत पर एक भी पैनल नहीं लगाया गया। पीड़ित हरिशंकर का आरोप है कि जब भी वह जानकारी के लिए संपर्क करते हैं तो उन्हें प्रक्रिया चलने की बात कहकर टाल दिया जाता है। उनका कहना है कि जिस सोलर प्लांट के लिए ऋण स्वीकृत हुआ, वह आज तक धरातल पर दिखाई नहीं दिया। इससे वह खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। पीड़ित ने मामले की शिकायत सरकारी हेल्पलाइन पर भी दर्ज कराई है। उन्होंने प्रशासन से जांच कर कार्रवाई करने, सोलर प्लांट स्थापित कराने अथवा जमा धनराशि वापस दिलाने की मांग की है। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में भी चर्चा शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि लाभार्थी के नाम पर ऋण स्वीकृत हो सकता है तो यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि योजना का लाभ समय पर उसे मिले। ग्रामीणों का का कहना है कि यदि ऐसी शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो योजनाओं के प्रति लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस शिकायत की जांच कर सच्चाई सामने लाता है या नहीं। क्योंकि मामला केवल एक ग्रामीण की परेशानी का नहीं, बल्कि सरकार की उस योजना की विश्वसनीयता से भी जुड़ा है, जिसका उद्देश्य आम लोगों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। हालांकि मामले में जब कना ट्रेडिंग का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो संपर्क नहीं हो सका। इस संबंध में जब एडीओ पंचायत प्रदीप कुमार से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि, मामला संज्ञान में नही है जानकारी कर उचित कार्यवाई की जाएगी। पीड़ित ने अभी शिकायत भी नही की है।

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