वाह यूपी पुलिस,गोरखपुर के थाने से पिस्टल-कारतूस गायब, रिटायर्ड दीवान पर एफआईआर

          श्री अवध डाटकाम  9839627223


गोरखपुर  :- अपनी कार्यशैली को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाली यूपी पुलिस ने एक बार फिर ऐसा कारनामा किया है कि जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हैं। हुआ यूं कि गोरखपुर के सहजनवा थाने के मालखाने से पिस्तौल और कारतूस गायब होने का मामला प्रकाश में आया है । प्रकरण सामने आने के बाद थानाध्यक्ष सहजनवा संजय मिश्रा ने रिटायर्ड दीवान के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। पिस्तौल और कारतूस वर्ष 2018 के चर्चित फायरिंग व हत्या के प्रयास के मुकदमे से जुड़े थे, जिसे पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से बरामद किया था।

नगर पंचायत सहजनवा के वार्ड नंबर-10 लुचुई में हुए विवाद से इसका संबंध था. जिसमें फायरिंग और हत्या के प्रयास के आरोप लगे थे और बरामद असलहे को विधिक प्रक्रिया के तहत फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया था, जो बाद में मालखाने में जमा हुआ था।

थानाध्यक्ष संजय कुमार मिश्र के मुताबिक फॉरेंसिक परीक्षण के बाद 25 मई 2019 को पिस्टल और कारतूस सहजनवा थाने भेजे गए। अभिलेखों के अनुसार विशेष वाहक कमलेश कुमार ने उक्त सामान तत्कालीन मालखाना प्रभारी एवं मुख्य आरक्षी दीनानाथ पाल को सुपुर्द किया था। बाकायदा मालखाना रजिस्टर में यह रिकार्ड भी दर्ज हुआ. करीब छह माह पूर्व जब मालखाने का चार्ज हस्तांतरित किया जा रहा था, तब रिकॉर्ड में दर्ज उक्त पिस्टल और कारतूस नहीं मिले. इसके बाद विभागीय स्तर पर जांच शुरू की गई।

जांच में मालखाने की जिम्मेदारी संभाल रहे तत्कालीन प्रभारी दीनानाथ पाल की भूमिका और लापरवाही सामने आने की बात कही गई. थानाध्यक्ष संजय कुमार मिश्र की तहरीर पर  सेवानिवृत्त मुख्य आरक्षी दीनानाथ पाल, निवासी रक्शा, थाना लालगंज, जनपद बस्ती के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में दर्ज असलहा और कारतूस आखिर मालखाने से कैसे गायब हुए?

बता दें कि वर्ष 2018 थानाक्षेत्र के लुचुई निवासी सत्यप्रकाश यादव की तहरीर पर पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर सर्वशक्ति यादव, शक्ति यादव और निखिल यादव के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था. तत्कालीन थानाध्यक्ष सत्य प्रकाश सिंह ने विवेचना के दौरान आरोपितों के कब्जे से उक्त पिस्टल और कारतूस बरामद किए थे. चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी यह असलहा न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा था।

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