मन मन्दिर को श्मशान न बनाएं - सन्त वाणी

 

       श्री अवध डाटकाम     9839627223

सुजानगंज/ जौनपुर :- इस धरती पर मानव शरीर एक मन्दिर के रूप में है जिसमें आत्मा रूपी परमात्मा का निवास है। इस मन मन्दिर में मृत जीवों के शरीर का टुकड़ा डालकर हमें इसे अपवित्र नहीं करना चाहिए। उक्त बातें जय गुरुदेव जन सेवा संस्थान मथुरा से क्षेत्र के इटहा गांव में जय गुरुदेव जी के संदेशों को जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से पधारे जय गुरुदेव के अनुयाई बाबू राम यादव ने कहा। शाकाहार एवं नशा मुक्ति अभियान और उसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्षणिक तामस इच्छापूर्ति के लिए जीवों की हत्या कर उसके शरीर के टुकड़ों को अपने पवित्र मन्दिर रूपी शरीर में डाल कर हमें इसे अपवित्र कर देते हैं। व्यसन इंसान को बर्बादी की राह पर ले जाता है। शराब के नशे में इंसान का आर्थिक, मानसिक, सामाजिक एवं शारीरिक नुकसान होता है। 

यदि इंसान नशा मुक्त होकर शाकाहारी बन जाए तो निश्चित ही उसे परमात्मा का दर्शन होगा और वह जीवात्मा परमात्मा से मिलकर चौरासी लाख योनियों में भ्रमण से मुक्त हो जाती है।आत्मा को परमात्मा से मिलाने के लिए गुरु का मार्गदर्शन जरूरी होता है। यह शरीर नस्वर है शरीर के साथ जुड़े सभी अंग नाशवान है इसलिए इन नाशवान आंख से परमात्मा का दर्शन नहीं हो सकता है परमात्मा का दर्शन पाने के लिए दिव्य ज्ञान चक्षु की आवश्यकता होती है जो केवल गुरु से ही प्राप्त हो सकता है। गुरु नाम महिमा और शक्ति का वर्णन करते हुए बताया कि हमारे भगवान श्री राम एवं भगवान श्री कृष्ण जी भी गुरु जी की शरण में जाकर मानव उत्थान के लिए ज्ञान अर्जित किया है। इस अवसर पर राम पदारथ निषाद ने गुरु जी से मिलने वाले नाम दान की महिमा बताते हुए कहा कि" कलयुग केवल नाम अधार,सुमिर सुमिर नर उतरही पारा"  इस कलयुग मे केवल प्रभु का नाम मात्र का सुमिरन करने से आत्मा इस संसार रूपी भव सागर से पार उतर जाती है।

इस अवसर पर गुड्डू मौर्य, कांशीराम यादव,अमर लाल निषाद, कर्म चन्द पाठक, दिनेश पाठक,देव सरन प्रजापति, रमेश पाठक, काली चरन प्रजापति, डा सत्य प्रकाश , धर्मेंद्र पाठक, उमानाथ उपाध्याय, भैया लाल गुप्ता सहित बड़ी संख्या में धर्मानुरागी उपस्थित रहे।

Post a Comment

0 Comments