तनख्वाह तो मिलेगी भले काम हो न हो, इस तरह चमत्कारी है सरकारी नौकरी--

       श्री अवध डाटकाम  9839627223

रिपोर्ट - मिथिलेश जायसवाल 

बहराइच।अखिल भारतीय साहित्य परिषद, बहराइच के तत्वावधान में श्री जानकी मंदिर, हरिनगर हमजा पुरा में वीर सावरकर एवं लोक माता अहिल्याबाई होलकर की जन्म जयन्ती पर एक काव्य गोष्ठी आयोजित हुई। गोष्ठी का संयोजन जनपद के प्रसिद्द कवि, शिक्षक एवं गज़लकार डा. दिनेश त्रिपाठी 'शम्स' के द्वारा किया गया। सरकारी नौकरी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा : "लगती सभी को प्यारी हैं सरकारी नौकरी, हर नौकरी पर भारी है सरकारी नौकरी। तनख्वाह तो मिलेगी भले काम हो न हो, इस तरह चमत्कारी है सरकारी नौकरी।" मुख्य अतिथि गंगोत्री प्रसाद त्रिपाठी ने वीर सावरकर का देश के प्रति त्याग एवं हिंदुत्व संरक्षण में उनके योगदान विषय पर विस्तृत प्रकाश डाला। सभा अध्यक्ष श्रीनाथ शुक्ल ने लोक माता देवी अहिल्याबाई होलकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन आज हमारे लिए प्रेरणा का विषय है क्योंकि जब मुगल शासक भारतवर्ष के मठ और मंदिर तोड़ रहे थे उस समय विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए उन्होंने भारतवर्ष के सभी प्रमुख मंदिरों का पुनर्निर्माण किया था। परिषद् के महामंत्री रमेश तिवारी ने मंच का संचालन करते हुए पढ़ा : "आबादी इंसान की बढती गई बढ़ती गई। जिंदगी घटती गई, इंसानियत मिटती गई। गलियों के कुत्ते यह देखकर हैरान हैं, इनसान की अब नस्ल उनकी नस्ल सी क्यों हो गई।“ प्रांतीय उपाध्यक्ष गुलाब चन्द्र जायसवाल ने पढ़ा : "महारानी अहिल्या संरक्षिका सनातन की, इसलिए सभी जय जयकार करने लगे। न्याय हेतु पति और पुत्र को भी दिया दंड, क्रूर अत्याचारी, भ्रष्टाचारी डरने लगे।" अध्यक्ष राधा कृष्ण पाठक ने सुनाया : "पुण्यश्लोक अहिल्याबाई, भारत की इतिहास बनी। राष्ट्र प्रेम की अनुपम गाथा, नारी शक्ति महान बनी।" संपूर्ण राष्ट्र में अपने गीतों के लिए प्रसिद्धि प्राप्त जनपद के वरिष्ठतम कवि राधकृष्ण शुक्ल 'पथिक' ने गीत, ग़ज़लों से सबको मुग्ध कर दिया। विमलेश जायसवाल, अयोध्या प्रसाद शर्मा 'नवीन', संत राम वर्मा 'वेताल', राजेश आत्मज्ञानी, गौतम शुक्ल 'गुमनाम' अर्चित पाठक, सुधीर मिश्र, मनोज मिश्र 'तनहा' अजित मौर्या, महेंद्र प्रताप सिंह, छोटे लाल गुप्त, राकेश रस्तोगी 'विवेकी', शालिनी शर्मा आदि कवि गण ने पुण्यश्लोक माता अहिल्याबाई के जीवन एवं राष्ट्र के प्रति उनके योगदान विषय सहित विभिन्न राष्ट्रवादी रचनाएं प्रस्तुत की। राम रोशन सिंह ने देश में धर्म परिवर्तन पर विचार रखा। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोता सहित मानवेन्द्र विश्वकर्मा, बुद्धि सागर पांडेय, राम गोपाल चौधरी, यज्ञ प्रसाद शुक्ल, बिष्णुकांत श्रीवास्तव, महेंद्र, मंगल प्रसाद, सुनील सिंह, हर्ष सिंह आदि ने भी अपनी उपस्थिति देकर कार्यक्रम  को सफल बनाया। इस मौके पर काफी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

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