सुजानगंज/ जौनपुर :-- प्रथम भक्ति संतन कर संगा, दूसरी रति मन कथा प्रसंगा,, रामायण की इस पंक्ति से स्पष्ट है कि भक्ति का पहला मार्ग संत सत्संग है। उक्त उद्गार क्षेत्र के गायत्री शक्तिपीठ शांति निकेतन एवं गोसाई वीर बाबा धाम सुजानगंज में चल रहे गायत्री महायज्ञ और पवन प्रज्ञा पुराण कथा के दौरान कथावाचक सुशीला जी ने व्यक्त किया। कथा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में सनातन संस्कृति को जीवंत बनाए रखने तथा उसके संरक्षण और पावन प्रज्ञा पुराण तथा रामचरितमानस का भी उल्लेख करते हुए कहा कि प्रथम भक्ति संतन कर संगा, दूसरी रति मन कथा प्रसंगा। उन्होंने संत सत्संग के प्रभाव का उदाहरण देते हुए कहा कि बाल्मिकी का जीवन संतों के सत्संग से बदल गया। कथा की ज्ञान गंगा बताते हुए उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति इसमें मन से गोता लगता है, वह सांसारिक भटकावों से मुक्त होकर ईश्वर की शरण में चला जाता है। और कथा श्रवण मात्र से ही दुख दूर होते हैं। ईश्वर की शरण में जाने पर परमपिता परमेश्वर स्वयं उसके योग क्षेम की चिंता करते हैं।
इस अवसर पर विद्या शंकर तिवारी, प्रेमशंकर तिवारी, पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष तिवारी, विजय कुमार तिवारी, हीरालाल, डा विद्यासागर त्रिपाठी, सहित कई विशिष्ट लोग मौजूद रहे।

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