जयगुरुदेव के कार्यक्रम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़--
सुजानगंज/जौनपुर :-- सत्संग कोई कथा कीर्तन नहीं है ,सत्संग कर्मों की मैल को धोता है। सत्संग से विवेक जागृति होता है। सत्संग में जीव के निज घर जाने की राह का बोध होता है। उक्त बातें क्षेत्र के कपूरपुर गांव में धर्म प्रचारक संस्था मथुरा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत पंकज जी महाराज अपने जौनपुर
जन जागरण के 85 वें पड़ाव पर कपूरपुर गांव में सत्संग को संबोधित करते हुए कहा। आगे कहा कि सत्संग खान-पान सुधारता है। सत्संग से ही समाज में यश कीर्ति की प्राप्ति होती है। मानस भी प्रमाण देती है कि मति-कीरत, गति भूत, भलाई, जो जेहि जतन जहां लगि पाई, सोइ जानेउ सत्संग प्रभाउ। लोकहुं वेद न आन उपाऊ।। इसलिये आप लोग सत्संग के एक-एक वचन को ध्यान से सुनो। हमारा आपका यह मनुष्य शरीर एक किराये का मकान है। समय पूरा होते ही यह मकान खाली करा लिया जायेगा। जीवात्मा के निकलते ही ये प्रधानी-सरपंची, ये मान-प्रतिष्ठा जाति-बिरादरी, शान शौकत यहीं श्मशान घाट पर समाप्त हो जायेगी। एक रात भी कोई अपने घर पर आपको रखने को तैयार नहीं होगा। अब आप सोचो-आपकी जीवात्मा का क्या होगा? इसको धर्मराय के दरबार में पेश कर दिया जायेगा। आपके अच्छे-बुरे कर्मों के हिसाब से इसको स्वर्ग-बैकुण्ठ या फिर नर्कों की सजा सुना दी जायेगी। वहां कौन आपकी मदद करेगा। हमारे गुरु महाराज परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज कहते थे कि मैं महात्मा नहीं हूँ, मैं तो आपका सेवक हूँ। मौत के वक्त घनघोर पीड़ा में जब आपके इष्ट और देवी-देवता पुकारने पर आपकी मदद में न आवें उस समय पर टूटती स्वांस पर आप जयगुरुदेव बोलना। जब आप जयगुरुदेव नाम बोलोगे तो मैं आपको मिलूंगा और मौत की पीड़ा ‘‘जन्मत मरत दुसह दुःख होई’’ से बचाऊँगा। मैं उन्हीं का सन्देश लेकर आया हूँ।
महाराज जी ने नशा त्याग करने तथा शाकाहार अपनाने की भी अपील किया और कहा कि ये नवयुवक आपकी पूंजी हैं।, देश की धरोहर हैं। इनके खानपान को सुधारना हमारा आपका दायित्व है। तभी एक अच्छा समाज बनेगा।
उन्होंने आगामी 28 नवम्बर से 2 दिसम्बर तक मथुरा में जयगुरुदेव आश्रम पर होने वाले पूज्यपाद दादा गुरु जी महाराज के 77वें पावन भण्डारे पर पधारने का निमन्त्रण भी दिया। शांति व्यवस्था में पुलिस प्रशासन का सहयोग रहा। इस अवसर पर ऋशिदेव श्रीवास्तव, आयोजक वीरेन्द्र मौर्य,राम पदारथ,करम चंद पाठक, ग्राम प्रधान अजय यादव, सत्यम यादव, अच्छे लाल पाल, जंग बहादुर, सीतापुर सहयोगी संगत से रमाकान्त, देसराज, रमेश, अशोक कुमार मौर्य, कामता प्रसाद आदि उपस्थित रहे। धर्म यात्रा अगले पड़ाव हेतु ग्राम पराहित के लिये प्रस्थान कर गई।


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