महराजगंज/उत्तर प्रदेश :-- कभी कभी मानवता इतना गिर जाती है कि इन्सानियत शर्मिंदा हो जाती हैं।ऐसी ही एक घटना महराजगंज जिले के नौतनवा कस्बे के राजेंद्र नगर में देखने को मिली जहां उक्त मुहल्ला निवासी लव कुमार पटवा की लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई। पत्नी पहले ही गुजर चुकी थी। तीन मासूम बच्चे राजवीर (14), देवराज (10) और एक छोटी बेटी अंतिम संस्कार के लिए दर-दर भटकते रहे।तीन दिन तक शव घर में पड़ा रहा, लेकिन न कोई पड़ोसी आगे आया, न रिश्तेदार। नगर पालिका ने भी मदद से हाथ खींच लिया। जब कोई सहारा नहीं मिला, तो मासूम बेटे पिता की लाश को ठेले पर रखकर नदी में प्रवाहित करने निकल पड़े। ठेले पर शव लेकर रोते-बिलखते बच्चों को देखकर भी राहगीर आगे नहीं आए। लेकिन इसी बीच ईश्वर ने राशिद कुरैशी और वारिस कुरैशी नामक दो फरिश्ते भेज दिया जो इंसानियत की मिसाल पेश की और दोनों ने मौके पर पहुंचकर लकड़ी और अन्य सामग्री की व्यवस्था की, और हिंदू रीति-रिवाज से लव कुमार पटवा का अंतिम संस्कार कराया। जिसकी क्षेत्र चर्चा है और हर इंसान दोनों फरिश्तों को साधुवाद दे रहा है।
यह असली भारत की तस्वीर है तथाकथित अपने आपकों हिन्दू बताने वाले इसे नहीं समझ सकते । एक मुसलमान ने ही अंतिम संस्कार करवाया। ऐसा है भारत देश मेरा मजहब अलग है माना पर दिल तो हिंदुस्तानी है।

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