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✍️ वीरेंद्र गुप्ता (बिंदु)
प्रयागराज/ थरवई-- फाफामऊ स्थित पंडिला हवाई पट्टी की जमीन पर हुए अतिक्रमण को मुक्त कराने की पहल शुरू हो गई जिसमे सी आर पी एफ के गेट नंबर दो पर अवैध तरीके से हुए अतिक्रमण को हटवाया गया जिसमे हवाई पट्टी की जमीन पर बने मेड को ट्रैक्टर से बराबर कर दिया वही वहा पर लगी अस्थाई दुकानों को दुकानदारों ने स्वत ही हटाना शुरू कर दिया जिनकी संख्या सैकडों में है इस कार्यवाही में अमित मिश्रा डी ई ओ रक्षा संपदा अधिकारी की टीम एवम कई लेखपाल मौजूद रहे । कब्जा मुक्त कराने करीब बारह बजे अधिकारी पहुंचे और सूचना अलाउंस की तो वहां अफरा तफरी मच गई हर कोई अपना समान समेटने में जुट गया हालाकि वहा पुलिस प्रशासन नही मौजूद थीं। पहले दिन कार्यवाही उदयचंद पुर गांव में हुई । जबकि बहमलपुर, कोडसर, जैतवार डीह,रामपुर, पंडिला ,सरसा, जल्लूपुर, वजीराबाद, बडनपुर, सेवाइत आदि मे जमीनों पर कब्जा है ।
1971 के युद्ध में अहम भूमिका निभा चुका पंडिला हवाई अड्डा
पंडिला हवाई पट्टी ब्रिटिश शासन में बनी थीं आजादी के बाद ही भारत सरकार अपने कब्जे में लेकर उसे इस्तेमाल कर रही है करीब 46 साल पहले भारत पाकिस्तान युद्ध के समय ये हवाई पट्टी पर लड़ाकू विमानों की आवाजाही हो रही थी गांव के बुजुर्गो ने बताया कि सेना अड्डे पर अपना कब्ज़ा जमा लिया था चारो तरफ से कटीले तार से घेरा बंदी की गई थी सुरक्षा की दृष्टि से लोगो के आवागमन पर कड़ा पहरा रहता था यदि गाव में कोई रिश्तेदार आ जाता तो उसे हवाई पट्टी के पहले रोक दिया जाता था और उनकी पहचान कराने के बाद ही उन्हें मिलने दिया जाता था वन विभाग से रिटायर्ड राधे श्याम तिवारी ने बताया की रनवे पर लगातार लड़ाकू विमानों की आवाजाही बनी हुई थी जिसके आवाज से सोना दुश्वार हो गया विष्णु गुप्ता ने बताया की वहा पर सिग्नल टावर बनाया गया था जिसमे से जहाजों को लैंडिंग करने के लिए पटाकों का इस्तेमाल किया जा रहा था रात में रनवे में जहाजों के उतरने के लिए लालटेन की मदद ली जाती थीं टावर के पास बड़ा झण्डा लगा रहता जिससे हवा का रुख पता चलता था जिसके विपरीत दिशा में जहाज उतरते थे जिससे जहाजों को रनवे पर लैंडिंग करने में सुविधा हो पंडिला हवाई पट्टी के अंदर तीन गांव भी बसे हैं जिसमे डाल तिवारी का पूरा, दुआरी,जबर पुरा, हवाई पट्टी से घिरा हुआ है ।
विष्णु गुप्ता
ने बताया कि 1971के युद्ध के समय मालवाहक जहाजों का आना जाना दिन रात लगा था करीब पचास की संख्या मे जहाज मौजूद थीं ।
राधेश्याम तिवारी
के अनुसार भारत पाकिस्तान युद्ध के समय रात में ब्लैक आउट किया जाता था घरों में दिया जलाने अलाव जलाने पर सेना उसे बंद करा देती थी।



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