भगवान भक्त के समर्पण भाव से होते हैं प्रसन्न: आलोक मिश्रा

✍️ समाचार एवं विज्ञापन के लिए सम्पर्क करें 9839627223


सुजानगंज/जौनपुर:-   परमात्मा के दरबार में छोटा बड़ा और ऊंच नीच का कोई विचार नहीं है भगवान लेकर भक्त के समर्पण भाव को ही देखते हैं उक्त उद्गार बसरही नाथ शिव मंदिर बसरही पर चल रहे रूद्र चंडी महायज्ञ के अवसर पर कथा व्यास आलोक मिश्रा ने व्यक्त किया ।भागवत कथा के प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने विदुर चरित्र के ऊपर विस्तार से प्रकाश डालते हुए मैत्रेय ऋषि के मिलन के संदर्भ में कहा कि मैत्रेय ऋषि ब्राह्मण थे जबकि विदुर दासी पुत्र थे लेकिन वहां ऊच नीच छोटे बड़े का कोई विचार नहीं था। भक्त ध्रुव के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए विद्वान वक्ता ने कहा कि ईश्वर भक्ति के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है। जब भी आपके मन मस्तिष्क में ईश्वर के आराधना का भाव जागृत हो जाए तभी से आप निष्ठा और समर्पण के साथ ईश्वर भक्ति कर सकते हैं। उन्होंने शिव तथा दक्ष प्रजापति का मनु मालिन एवं जड़ भारत की कथा पर भी प्रकाश डाला । उल्लेखनीय है यज्ञ का आयोजन तीर्थराज प्रयाग से आए विकास शुक्ला द्वारा विश्व कल्याणार्थ किया गया है। विकास शुक्ला कोरोना कल में ही विश्व कल्याण के लिए 108 रूद्र चंडी महायज्ञ का संकल्प लिया था। जिसमें बसरही में चल रही रूद्र चंडी महायज्ञ 17वीं महायज्ञ है। विकास शुक्ला ने श्रद्धालुओं का आवाहन करते हुए कहा कि यह यज्ञ आप सबकी है ।पूर्ण मनोयोग से सहयोग करें। कार्यक्रम में शारदा प्रसाद मिश्र विजय तिवारी रामसूरत आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।


Post a Comment

0 Comments