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मिथिलेश जायसवाल
बहराइच। अवध वाटिका साहित्य संस्थान (पंजी)बहराइच के तत्वावधान में आयोजित नियमित पाक्षिक कवि गोष्ठी का आयोजन सेनानी भवन सभागार में किया गया जिसकी अध्यक्षता किशोरी लाल चौधरी ने किया। संचालन तिलक राम अजनबी ने किया। विनोद पाण्डेय विनोद की वाणी वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ फिर सुनील कुमार ने पढ़ा --घुट रहा है दम शहर की फिजाओं में, अब सुकून की छांव चाहता हूं, इसलिए गांव जाना चाहता हूं। इस अवसर पर उपस्थित कवि शैलेन्द्र मिश्र, मो नसीम, रईस सिद्दीकी ने अपने भावों को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया फिर तिलक राम अजनबी ने पढ़ा --न्यायालय बस नाम के न्यायाधीश अनेक, सबके सब झूठे यहां न्याय करे वह 'एक '।हास्य कवि पी.के.प्रचण्ड की कविता खोपड़िक भार सदा, दुसरेक खोपड़िप मढ़ा कीन। हम प्यार मुहब्बत का जानी जस आवा जू मा गढ़ा कीन। बस हमसे पढ़ेम भवा गलती लव लेटर वहिके रोज मिले सुन कर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं।
ऊ ईलू ईलू लिखा किहिस हम उल्लू उल्लू पढ़ा किन।। अंत में किशोरी लाल चौधरी ने पढ़ा --जब पांव करे नर्तन, समझ लेना कि होली है। प्रेम में रंग जाये तन मन समझ लेना कि होली है। इस अवसर पर उपस्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कल्याण परिषद के संगठन मंत्री रमेश चन्द्र मिश्र व संस्था के संरक्षक राम सागर राव (पूर्व विधायक) ने कवियों व उपस्थित साहित्य प्रेमी बंधुओं विनोद कश्यप संजय कुमार वर्मा एडवोकेट व अन्य तमाम साथियों को आशीर्वचन व शुभकामनाएं दी ।

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