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शमीम अहमद
जौनपुर ।जिला कारागार जौनपुर के प्रांगण में स्वामी अड़गड़ानंद महाराज जी के शिष्य श्री श्रद्धा जी महराज ने सभी कैदियों को संबोधित करते हुए कहा कि काम क्रोध और लोग अपराध की जननी है। इनका परित्याग कर गीता के अनुरूप आचरण करें। और एक ही परमात्मा की शरण में रहे। ब्रह्माण्ड में ईश्वर एक ही है।भले ही कई नाम और कई रूपों में मानव पुकारते और पूजते हैं। उक्त बातें प्रवचन के समय चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन स्वामी अड़गड़ानंद महाराज जी के शिष्य पटना आश्रम से आए श्रद्धा बाबा ने जेल में कैदियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह जेल है ।इसे जेल नहीं बल्कि सुधार गृह समझे और अपने माता-पिता की सेवा करें। साथ गीता में यथार्थ गीता को पढ़ें, जो न पढ़े लिखे हो वह दूसरों से पढ़वा कर सुने।अपने तप बल से ही स्वामी विवेकानंद, दयानंद सरस्वती और अन्य तमाम महापुरुष हुए, जो अपने ज्ञान का लोहा मनवाया हैं।बाबा जी द्वारा यथार्थ गीता कैदियों में तथा जेल के स्टाफ में निशुल्क लगभग 500 प्रतियां बांटी गई । पुनः बताते हुए स्वामी जी ने कहा कि इस नश्वर संसार में श्री कृष्ण जी महाराज ने ओम के जाप पर बल दिया है ।और आदेश भी दिया है। कि चलते-फिरते सोते जागते जब नाम याद आया करें ओम का जाप करें निश्चित रूप से कल्याण होगा। आप वार्ता करते हुए श्री श्रद्धा बाबा ने कहा कि बीस वर्षों से यथार्थ गीता को स्वामी जी के आदेश पर निःशुल्क बाटा जा रहा है। देश के लगभग सभी राज्यों और जिलों में उक्त यथार्थ गीता का वितरण किया गया है। पूछे जाने पर बाबा जी ने कहा ।"जाकी रही भावना जैसी हरी मूरत देखी तिन तैसी"।। निश्चित रूप से बंदीगृह में आए हुए कैदी भी अनेकों प्रकार की मानसिकता से ग्रसित होते है। लक्ष्य के बारे पूछे जाने पर बताया कि जब तक जीवन रहेगा इसी प्रकार हरि गुण गाते रहेंगे।उसके बाद वहां उपस्थित पत्रकारों को भी यथार्थ गीता प्रसाद के रूप में दिया।इस मौके पर आचार्य विनय कुमार दुबे, शैलेंद्र सिंह, राजेश यादव ,शुभम, अरविंद यादव ,आनंद शुक्ला, संतोष यादव सहित जेल के अधीक्षक डॉक्टर विनय कुमार व समस्त कर्मचारियों अधिकारियों भी उपस्थित रहे ।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राधा कृष्ण शर्मा ने किया।

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