फसलों को लू प्रकोप से बचाने के लिए कुछ बातों का ध्यान दें किसान - प्रिया नंदा

                 श्री अवध डाटकाम  9839627223

रिपोर्ट - मिथिलेश जायसवाल 

बहराइच :-- मौसम आधारित राज्य स्तरीय कृषि परामर्श समूह द्वारा मौसम पूर्वानुमान के दृष्टिगत साप्ताहिक पाक्षिक रूप से कृषकों के उपयोगार्थ प्रदेश में लू-प्रकोप (हीट वेब) से कृषि फसलों की सुरक्षा/भूमि में जल एवं नमी संरक्षण हेतु संस्तुतियों एडवाइजरी निर्गत की जायेगी। जिला कृषि रक्षा अधिकारी प्रिया नंदा ने बताया कि हीट वेब से फसलों को बचाने के लिए किसानों को दी गई जानकारी के अनुसार कार्य करने की जरूरत है जिनसे उनकी फसलों की सुरक्षा बनी रहे उन्होंने बताया कि लू-प्रकोप (हीटवेव) से कृषि फसलों की सुरक्षा/भूमि में जल एवं नमी संरक्षण हेतु प्रस्तावित सामान्य संस्तुतियां,भूमि में नमी संरक्षण हेतु मल्चिंग एवं खरपतवार नियंत्रण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। मल्च के रूप में बायोमास (जैव उत्पाद) का प्रयोग किया जाये।फसलों की सीडलिंग (पौध) की अवस्था में मल्चिंग करें।सिंचाई जल की क्षति न्यूनतम करने के लिए फसलों की सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सिंचाई विधि का प्रयोग किया जाये।नियमित अन्तराल पर सायंकाल में खेतों में हल्की सिंचाई करें।

खेतों में जैविक खादों का प्रयोग किया जाये।फसलों की बुवाई पंक्तियों में करें।सिंचाई नाली में सिंचाई करते समय जल की क्षति को कम करने के लिए सबसे आसान एवं सस्ती तकनीक के रूप में पॉलीथीन शीट का उपयोग करें। सिंचाई पूर्ण हो जाने पर इस पॉलीथीन शीट को उठा लेना चाहिए। इसके साथ ही सिंचाई हेतु कन्वेंस पाइप का उपयोग किया जाना चाहिए।

सिंचाई नाली में सिंचाई करते समय जल की क्षति को कम करने के लिए सबसे आसान एवं सस्ती तकनीक के रूप में पॉलीथीन शीट का उपयोग करें। सिंचाई पूर्ण हो जाने पर इस पॉलीथीन शीट को उठा लेना चाहिए। इसके साथ ही सिंचाई हेतु कन्वेंस पाइप का उपयोग किया जाना चाहिए।खेत पूर्णतया समतल होने चाहिए जिससे कि सिंचाई जल पूरे खेत अथवा खेत के टुकड़ों में समान रूप से वितरण हो सके।

उपरहार भूमियों में सिंचाई के लिए कन्टूर ट्रैन्च विधियों का प्रयोग किया जाये।जहां तक सम्भव हो सके, वर्षा के बहते जल का संग्रहण / संरक्षण किया जाय, जिससे फसलों की जीवन रक्षक सिंचाई एवं उनकी वृद्धि की क्रॉन्तिक अवस्थाओं पर की जाने वाली सिंचाई की व्यवस्था को सुनिश्चित किया जा सके।भूजल ही सबसे ज्यादा भरोसे का सिंचाई जल स्रोत है, अतः इसके अन्यायपूर्ण दोहन से बचे।

कठोर अवमृदा / चट्टानी इलाकों के कुंओं में जल की उपलब्धता में निरन्तरता बनाये रखने हेतु लगातार पम्पिंग की जगह थोड़े-थोड़े समय की पम्पिंग कुछ-कुछ समयान्तराल पर करना चाहिए।धान नर्सरी में पर्याप्त नमी रखे व पानी की निकासी करें।

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