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रिपोर्ट - मिथिलेश जायसवाल
बहराइच :- जिले के नगर पंचायत मिहींपुरवा में पिछले गुरुवार को बाजार से घर लौटते समय छुट्टा सांड के हमले से घायल युवक की शुक्रवार को इलाज के दौरान मौत हो गई जिससे परिवार में कोहराम मच गया। आलम यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार भले ही गाय संरक्षण पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही हो लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है मिहींपुरवा नगर पंचायत में सांड के हमले में घायल युवक की मौत के बाद सरकारी सिस्टम की पोल खुल गई है।छुट्टा मवेशियों की समस्या ने एक और परिवार को गहरा जख्म दे दिया। नगर पंचायत मिहींपुरवा निवासी 30 वर्षीय मनीष वर्मा पुत्र ओमकार वर्मा की शुक्रवार सुबह लखनऊ के केजीएमयू ट्रामा सेंटर में उपचार के दौरान मौत हो गई। वह गुरुवार को बाजार से घर लौटते समय एक छुट्टा सांड के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सांड ने मनीष को कई बार पटककर घायल कर दिया। आसपास के लोगों ने किसी तरह उन्हें बचाया और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिहींपुरवा पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों के जरिए केजीएमयू लखनऊ रेफर किया गया, जहां एक सप्ताह तक इलाज चलने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। युवक की मौत से परिवार में कोहराम मच गया है। वहीं क्षेत्रीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि कस्बे और आसपास के क्षेत्रों में छुट्टा सांड व मवेशी लंबे समय से लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं, लेकिन समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही का परिणाम है। यदि समय रहते छुट्टा मवेशियों को गौशालाओं तक पहुंचाने की प्रभावी व्यवस्था होती तो एक युवा की जान बच सकती थी। लोगों ने प्रशासन से तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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