तेंदुए के हमलें से हिला बहराइच, एक साल में किसान सहित 9 मासूम की हुई मौत


श्री अवध डाटकाम  9839627223

रिपोर्ट - मिथिलेश जायसवाल 

बहराइच :- जिले का कतर्नियाघाट क्षेत्र में लगातार तेंदुए हो हमला पूरी तरह डर गया जहां किसान सहित नौ मासूम अपनी जान गंवा चुके हैं। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग क्षेत्र की सुंदरता और प्रसिद्धि यहां के लोगों के जीवन के लिए काल का रूप धारण कर चुकी है जंगल से निकलकर गांव की ओर लगातार वन्य जीव रुख कर रहे हैं जिससे मासूम बच्चों सहित ग्रामीणों की मौत हो रही है । ग्रामीण दहशत के साए में रहकर अपना जीवन काट रहे हैं ग्रामीण जब भी अपनी बात वन विभाग सहित अन्य अधिकारियों से कहते हैं तो उनके पास वन्यजीवों से सुरक्षा देने के लिए कोई भी योजना जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देती है जवाब महज गस्त बढ़ाने और पिंजरा लगाने तक ही सीमित रह जाता है वही अपनों को खोने वाले लोग दहशत में अपना जीवन गुजार रहे हैं।वन विभाग की ठोस योजना का ना होना या फिर ग्रामीण के जागरूकता का अभाव वन्य जीवों के हमले का कारण तो नहीं है।सात वन रेंजों में फैले इस विशाल जंगल के बीच कई ऐसे छोटे-छोटे वनखंड मौजूद हैं, जो वर्षों पहले तो प्राकृतिक संतुलन का हिस्सा थे, लेकिन समय के साथ गांवों के फैलाव और खेती की बढ़ती सीमाओं ने इन्हें आबादी से सटा दिया। जंगल और बस्तियों के बीच की प्राकृतिक दूरी लगातार घटती गई और मानव-वन्यजीव टकराव का खतरा पहले से कहीं अधिक गंभीर बनता जा रहा है।

पिछले कुछ वर्षों में गन्ने की खेती का तेजी से बढ़ा रकबा इस संकट को और जटिल बना रहा है। ऊंचे, घने और लंबे समय तक खड़े रहने वाले गन्ने के खेत तेंदुओं के लिए सुरक्षित वास बन चुके हैं। दिन के उजाले में यही खेत उनका जंगल की तरह ठिकाना बनते हैं और रात का सन्नाटा घिरते ही उनका रुख गांवों की ओर हो जाता है।

वन क्षेत्र से सटे गांवों में तेंदुओं की मौजूदगी और हमलों की बढ़ती घटनाओं ने लोगों के मन में स्थायी दहशत पैदा कर दी है। छोटे वनखंड अब वन्यजीवों को पर्याप्त आश्रय नहीं दे पा रहे, जबकि खेतों में छिपे तेंदुए मानव गतिविधियों के बेहद करीब रहकर शिकार की नई प्रवृत्तियां विकसित कर रहे हैं। खेत, मेड़, आंगन और गलियां सब मानो एक अदृश्य खतरे की रेखा में तब्दील हो चुके हैं, जहां हर आहट अनहोनी का संकेत लगने लगी है। इस भयावह स्थिति का सबसे दर्दनाक उदाहरण शनिवार की शाम को मोहकम पुरवा गांव में सामने आया जब घर के आंगन में खेल रही मासूम बालिका सहजल पर तेंदुए ने हमला कर दिया। पिता ने साहस दिखाते हुए बच्ची को उसके चंगुल से छुड़ा तो लिया, लेकिन गंभीर चोटों के चलते उसकी जान नहीं बच सकी। इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को लोगों को झकझोर दिया और जंगल-गांव के बीच बिगड़ते संतुलन की सच्चाई को एक बार फिर उजागर कर दिया।ग्रामीणों का मानना है कि समस्या का समाधान केवल गश्त और चेतावनी तक सीमित नहीं रह सकता। वन क्षेत्र का स्पष्ट सीमांकन, संवेदनशील गांवों में सौर लाइट और सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था, ऊंचे मचान, त्वरित रेस्क्यू टीम की उपलब्धता, स्कूल से  लेकर गांव स्तर तक जागरूकता अभियान तथा गन्ना कटाई के मौसम में विशेष निगरानी जैसे ठोस कदम समय की जरूरत हैं। इसके साथ ही स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी के बिना किसी भी योजना का प्रभाव सीमित ही रहेगा।कतर्नियाघाट की हरियाली जहां वन्यजीवों का स्वाभाविक घर है, वहीं सीमावर्ती बस्तियों के लिए वही हरियाली अब अनिश्चित भय की छाया बनती जा रही है। एक वर्ष में एक किसान सहित नौ मासूमों की असमय मौत हो चुकी है लेकिन इन हम लोग को रोकने के लिए वन विभाग के पास कोई ठोस नीति नियम या संसाधन नहीं है जिससे आए दिन लगातार हमले हो रहे हैं और निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है लोग उम्मीद लगा कर बैठे हैं कि कब कोई ऐसी नीति तैयार होगी जिससे जंगली जानवरों से बच्चों और ग्रामीणों को सुरक्षा प्रदान होगी।आपको बताते चलें किन-किन लोगों ने बीते एक वर्ष में अपनों को खोया है।19 जनवरी 2025 को सुजौली वन रेंज के अयोध्या पुरवा निवासी आयशा की मौत।एक मई 2025 को धर्मापुर वन रेंज के जलिहा निवासी शमा की मौत।

13 जून 2025 को धर्मापुर वन रेंज के धर्मापुर निवासी शहिद की मौत।12 जुलाई 2025 को मोतीपुर वन रेंज के मनोहर पुरवा निवासी अरविंद कुमार की मौत।

30 सितंबर 2025 को ककरहा वन रेंज के धरमपुर निवासी कन्हई लाल की मौत।15 नवंबर 2025 को कतर्नियाघाट वन रेंज के सीताराम पुरवा निवासी अभिनंदन की मौत।18 दिसम्बर 2025 को सुजौली वन रेंज के अयोध्या पुरवा निवासी आसमान की मौत।29  जनवरी 2026 को निशान गाडा वन रेंज के मुखिया फार्म रमपुरवा निवासी अनुष्का की मौत।4 फ़रवरी 2026 को कतर्नियाघाट वन रेंज के निषादनगर निवासी सुभाष की मौत।7 फ़रवरी 2026 को सुजौली वन रेंज के मोहकम पुरवा  निवासी सहजल की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही मौत से ग्रामीण दहशत के साए में अपना जीवन जीने को मजबूर है।

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