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रिपोर्ट - मिथिलेश जायसवाल
बहराइच। पिछले दिनों वन विभाग द्वारा पकड़े गए एक नर बाघ को गोरखपुर चिड़ियाघर भेज दिया गया ।गोरखपुर चिड़ियाघर भेजे जाने के बाद से वन्य जीव प्रेमियों में काफी निराशा है वन्य जीव प्रेमी विभाग की इस गाइडलाइन से काफी आहत हुए हैं उनका कहना है कि एक तरफ विभाग वन्य जीव संरक्षण के लिए गाइडलाइन का पालन करवाता है वही गाइडलाइन का पालन न करते हुए बाघ को उम्र कैद की सजा देकर वन्य जीव प्रेमियों को भी निराश किया है। पिछले दिनों वन प्रभाग बहराइच के महसी तहसील क्षेत्र के अंतर्गत रेहुआ हुआ मंसूर गांव में जंगल से भटक कर पहुंचे बाघ को वन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षित रेस्क्यू किया था। तत्काल रेस्क्यू किए जाने पर वन विभाग की क्षेत्र के लोगों ने सराहना भी की थी। बाघ का डॉक्टरों के पैनल ने जांच किया तो पता चला कि बाघ पूरी तरह से स्वस्थ है स्वस्थता के आधार पर बाघ को जंगल में छोड़ जाना था लेकिन जंगल में जगह न होने का बहाना बनाकर विभाग ने स्वस्थ बाघ को गोरखपुर में स्थित चिड़ियाघर भेज दिया। चिड़ियाघर भेजे जाने की सूचना मिलने पर वन्य जीव प्रेमियों में निराशा और नाराजगी देखने को मिली ।20 वर्षों से वन एवं वन्य जीव संरक्षण पर कार्य करने वाली संस्था कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के मुखिया भगवानदास लखमानी ने बाघ को चिड़ियाघर भेजे जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए मांग की है कि चिड़ियाघर भेजे गए बाघ को वापस लाकर जंगल में छोड़ जाए उन्होंने यह भी बताया कि वन विभाग ने जंगल में जगह न होने का जो बहाना बनाया है वह पूरी तरह से षड्यंत्रकारी है। वन्य जीव विशेषज्ञ कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने स्वस्थ बाघ को चिड़ियाघर भेजे जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि वन विभाग की नादानी से एक स्वस्थ नर बाघ को उम्र कैद की सजा भुगतनी पड़ रही है जिससे वन्य जीव संरक्षण पर काफी असर पड़ेगा। इसके साथ ही जनपद के अन्य वन्य जीव प्रेमियों ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से वन विभाग की इस कार्यशैली का विरोध जताया है। आपको बताते चले कि वन्य जीव संरक्षण के तहत आने वाली एनटीसीए की गाइडलाइन के तहत स्वस्थ बाघ को उसके वास जंगल में ही उसे छोड़ा जाना चाहिए था लेकिन वन विभाग के उच्च अधिकारियों के निर्देश ने एनटीसीए की गाइडलाइन को भी अलग रखते हुए एक स्वस्थ नर बाघ को उम्र कैद की सजा सुना दी। इससे महज कुछ दिन पूर्व भी कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग क्षेत्र में पकड़े गए एक बाघ को कानपुर चिड़ियाघर भी भेजा जा चुका है।

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