कल तक सलाम जिसका मेरे साये को भी था, आया न मेरे घर बुरे हालात में कभी : नीलेन्द्र राना

 


जरवल में शानदार तरही मुशायरे का हुआ आयोजन

रिपोर्ट -- अबू शहमा 

जरवल/बहराइच :- नगर पंचायत जरवल क्षेत्र में बाबा आज़ाद जरवली के संयोजन में शानदार तरही मुशायरा का आयोजन किया गया। मुशायरे की अध्यक्षता कैफ जरवली व संचालन अज़्म गोंडवी ने किया। 

        मुशायरा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि  फरीद अहमद एडवोकेट और विशिष्ट अतिथि ज़मीर फ़ैज़ी रामनगरी को माला पहना कर स्वागत किया गया।

मुशायरे की शुरुआत मिसर ए तरह से हुई..

खुशबु बहार चांदनी बरसात मे कभी..


मुशायरे में शायरों और कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं......

शायर मुजीब सिद्दीकी ने शेर पढ़ते हुए कहा कि....

"खुशबू उसी के आज भी महकाये है हयात,

आया था एक शख़्श मेरी ज़ात मे कभी"

शायर शुजाअत जरवली ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

डूबा हुआ है खून से लफ़्ज़ों का पैरहन

ढूँढूँ किताब दिल की इबारात मे कभी

शिक्षक व कलमकार शायद नीलेंद्र राना ने शेर पढ़ते हुए सुनाया...

कल तक सलाम जिसका मेरे साये को भी था

आया न मेरे घर बुरे हालात में कभी

शायर मौलाना इमरान जरवली ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

सर पा बिठाये तुमको जो छोड़ो ये नफरते

तब्दीलिया तो लाओ खयालात मे कभी

शायर कमर करनैलगंजवी ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

इक्सा नही रहा है ज़माना कभी क़मर

अजायेंगे ये लोग भी औक़ात मे कभी

शायर तौफीक जरवली ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

हालात पर हमारे अभी तज़्किरा न कर

लम्हात का सिंगार था लम्हात मे कभी

शायर ज़मीर फ़ैज़ी रामनागरी ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

हमने क़दम क़दम पा किया अहतीरामे इश्क़

बहके नही है शिद्धते ज़ज़्बात मे कभी

शायर ह़फ़ीज जरवली ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

इतनी भी कीजिये ना मेरी जान बे रूखी

गुस्से की बात और मुलाक़ात मे कभी

शायर कैफ़ जरवली ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

बिखरा के रुख पा जुल्फ सरे बाम आइये

खुशबू बहार चाँदनी बरसात मे कभी

शायर डाक्टर असलम हाश़मी ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

दरया की क्या मिसाल समंदर से ये कहे

आकर दिखाईये कभी औक़ात मे कभी

शायर डाक्टर अलीम हैदर  जरवली ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

मसकन बदल बदल के तुम आते हो रोज़ो शब

साँसों मे धड़कनो मे खयालात मे कभी

शायर नफीस जिग़र जरवली ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

तूने न सोचा होगा खयालात मे कभी

हम लोग जितना देते थे खैरात मे कभी

शायर मौलाना खालिद जरवली ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

आदम व हव्वा दोनों जुदा हो गये मगर

दोनों को रब मिलायेगा अरफ़ात मे कभी

शायर अज़्म गोंडवीं ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

इक़बाल नूरी शाकिरो पैकर भी आये याद

जरवल जो आया मेरे खयालात मे कभी 

शायर बाबा आज़ाद जरवली ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

क्या कहफ़ियत है मेरी वही जान पायेगा

जो फिर चुका है गरदिशे हालात मे कभी

शायर तौहीद आलम जरवली ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

किस हाल मे गुज़ार रहा हूँ हयात को

ये देखने घर आइये बरसात मे कभी

शायर दर्द फ़ैज़ खान लखनवीं ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

देखा है आईना तो पस-ए-आईना भी देख

उतरा नहींं हैै कोई मेरी ज़ात में कभी

शायर अरमान जरवली ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

अरमान उनको मुझसे यहां तक गुरेज़ है 

भूले से भी न आए खयालात में कभी

 शायर बैढ़ब जरवली ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

घर मे तो एक बोटी ही हिस्से मे आती है

जी भर के गोस्त खायेंगे बारात मे कभी

शायर तनवीर नूरी जरवली ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

तनवीर उसने जाते हुए क्यू कहा है ये

दरया निकारे आओ किसी रात मे कभी

शायर साहिर बहराइची ने शेर पढ़ते हुए सुनाया कि....

वो भी हैं आज मेरे मुक़ाबिल खड़े हुए

देता था जिनको सिक्के में ख़ैरात में कभी।

  मुशायरे में शायर मतीन जरवली, मास्टर अलीम जरवली, शुऐब अख्तर जरवली, शादान जरवली, वक़ार हरचंदवी, राजू दुर्रानी, अब्दुल मंन्नान कटरवी,  इमरान मसूदी, कौसर सलमानी, अनीस करनलगंजवी, जईम अख्तर रामनगरी, ताज कटरवी आदि दर्जनों शायर व कलमकारों ने अपनी नज़म हुआ शायरी से लोगों का मनोरंजन करते हुए अपनी रचनाएं प्रस्तुत की

     

           इस तरही मुशायरे  मौके पर समाज सेवी शादाब पहलवान मो.आदिल नफीस सराफा, बाबा डीजे, परवेज़ अशरफ, कुत्बुद्दीन मिस्तरी, आज़ाद क़ुरैशी, आबिद अली समेत कसीर तादाद में जरवल , कटरा, मीरगंज व जरवल के लोगों ने शिरकत की।

Post a Comment

0 Comments