हिंसक वन्य जीव की खोज में भोपाल एवं बंगाल की विशेषज्ञ टीमों की ली जा रही है मदद


रिपोर्ट - मिथिलेश जायसवाल 

 बहराइच  :- बहराइच वन प्रभाग, बहराइच के कैसरगंज रेंज अन्तर्गत 09 सितम्बर 2025 की रात्रि को ग्राम- पराग पुरवा, पोस्ट- मझारा तौकती, थाना-कैसरगंज, तहसील-कैसरगंज एवं 11/12 सितम्बर 2025 की रात्रि लगभग 03 बजे ग्राम - भौरी, गजरा- बहोरवा, पोस्ट- मझारा तौकती, थाना- बोण्डी, तहसील - महसी में अज्ञात वन्य जीव द्वारा किये गये हमले के दृष्टिगत प्रभाग स्तर एवं उच्च स्तर से गश्ती दलों का गठन किया गया है जो दिवस/रात्रि वन्य जीव सक्रियता क्षेत्रों में गश्त की कार्यवाही कर रही हैं।

यह जानकारी देते हुए प्रभागीय वनाधिकारी बहराइच राम सिंह यादव ने बताया कि भोपाल एवं बंगाल से दो विशेषज्ञ टीम को मय थर्मल ड्रोन के साथ बुलाया गया है जिनके द्वारा वन्य जीव सक्रियता वाले क्षेत्र में पहुंचकर हिंसक वन्य जीव को खोजने की कार्यवाही की जा रही है। इसके अतिरिक्त एक अन्य ड्रोन कैमरे को चलाकर वन्य जीव को खोजने की कार्यवाही की जा रही है। गश्ती दलों द्वारा कैमरा ट्रैपस को संवेदनशील स्थलों पर स्थापित किया गया है। जिससे उपद्रवी वन्य जीव के आवागमन को खोजा जा सके। वन्य जीव के हमले से प्रभावित ग्रामों में सोलर सीसीटीवी कैमरे स्थापित किये जाने की कार्यवाही की जा रही है। ताकि वन्य जीव की पहचान सुनिश्चित करते हुए उसे सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।

डीएफओ श्री यादव ने बताया कि स्थानीय ग्रामीणों द्वारा अवगत कराया गया है कि क्षेत्र में दिखाई देने वाला हिंसक जीव चितकबरा, धब्बेदार, लम्बी पूंछ वाला है जिसकी समानता तेंदुए (लेपर्ड) से मिलती जुलती है। उक्त के दृष्टिगत सम्भावित स्थानों पर 03 ट्रैपिंग केज लगाये गये हैं। गश्ती टीमों द्वारा पैदल चलकर सक्रिय वन्य जीव को चिन्हित किये जाने एवं पगमार्क खोजने की कार्यवाही की जा रही है। जन जागरूकता टीमों द्वारा स्थानीय ग्रामीणों को हिंसक वन्य जीवों से बचाव हेतु लगातार जागरूक करते हुए ग्रामवासियों को रात्रि में अपने घरों के अन्दर दरवाजा बन्द करके स्वयं एवं बच्चों को सुरक्षित सुलाने हेतु आग्रह किया जा रहा है। गश्ती टीमों द्वारा वन्य जीव के हमलों से प्रभावित ग्राम के बाहरी क्षेत्रों में पटाखों को दगाकर वन्य जीव को रोकने की कार्यवाही की जा रही है। वन विभाग, पुलिस विभाग एवं जिला प्रशासन के बीच आपसी समन्वय स्थापित करते हुए हिंसक जीव के हमले से प्रभावित क्षेत्र में दिवा-रात्रि गश्त की जा रही है जिससे कोई भी अप्रिय घटना घटित नहीं होने पायी है।

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