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खंड विकास अधिकारी कार्यालय में कार्यरत उर्दू बाबू का पैसा मांगते हुए विडियो हुआ वायरल
सुजानगंज/जौनपुर :- जन्म प्रमाण पत्र तथा मृत्यु प्रमाण बनवाने के नाम पर सरकार ने धनउगाही का एक और माध्यम बनाया है जिसका खुलासा स्वयं जौनपुर जिले के सुजानगंज खण्ड विकास कार्यालय में तैनात उर्दू बाबू सुल्तान ने किया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में सुल्तान बाबू बताते हैं कि प्रति फाइल के हिसाब से पैसे देने पड़ते हैं।
सरकार जितनी पारदर्शिता बरतने का प्रयास कर रही है कर्मचारी सरकार की योजनाओं को में उतना ही जिम्मेदारी के साथ कमाई का तरीका बना रहे हैं। एक तरफ जहां एंटी करप्शन टीम लगातार भ्रष्ट कर्मचारियों अधिकारियों के उपर अपना शिकंजा कस कर रही वहीं अभी भी कुछ कर्मचारी अधिकारी भ्रष्टाचार करने में तनिक भी नहीं डर रहे हैं। वायरल विडियो में एक प्रार्थी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसील में आवेदन किया जिसके बाद निरीक्षण के लिए तहसील से उसकी फाइल खंड विकास अधिकारी कार्यालय पर भेजी गई जहां ग्राम ग्राम विकास अधिकारी द्वारा निरीक्षण करने के पश्चात उस फाइल को पुन: तहसील भेजना था परंतु उस फाइल को तहसील भेजने के लिए खंड विकास अधिकारी कार्यालय में कार्यरत उर्दू बाबू सुल्तान ने प्रार्थी से पैसों की मांग की जिसमें उर्दू बाबू सुल्तान ने बताया कि यह पैसा हमें प्रति फाइल के हिसाब से तहसील में तथा अधिकारियों को भी देना पड़ता है और बिना पैसा दिए आपकी फाइल नहीं जा पाएगी अगर जाएगी भी तो वही धरी की धरी रह जाएगी और जन्म प्रमाण पत्र बनने में कई महीने लग जाएंगे। अब सवाल यह है कि 1- यदि कर्मचारी सुल्तान की बात सही है कि हमें कई लोगों को पैसा देना पड़ता है तो यह पैसा जाता कहां है तथा किन-किन लोगों के पास जाता है? तथा दुसरा सवाल यह है कि जब सरकार दस्तावेजों को बनवाने में इतनी पारदर्शिता बरत रही है तो इस प्रकार के भ्रष्ट कर्मचारियों का नाम यदि भ्रष्टाचार करने में या भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में नाम सामने आता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही होगी की नहीं? इस संदर्भ में पूछे जाने पर खंड विकास अधिकारी सुजानगंज श्याम नारायण चतुर्वेदी ने बताया कि मामले को संज्ञान में आते ही हमारे द्वारा संबंधित कर्मचारी को आरोप के स्पष्टीकरण के लिए पत्र जारी किया गया है।
अब यहां सवाल यह उठता है कि वायरल वीडियो में सुल्तान इस बात को बता रहे हैं कि प्रति फाइल के हिसाब से पैसे देने पड़ते हैं फिर खण्ड विकास अधिकारी द्वारा स्पष्टीकरण मांगना लोगों को गुमराह करने जैसा है।

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