सुजानगंज/जौनपुर:- इंसान के अन्तःकरण में अच्छे-बुरे विचार आते जाते रहते है। इन्हीं अच्छे-बुरे विचारों का द्वंद ही देवासुर संग्राम है।जो इंसान अपने अन्दर की बुराईयों को मार लेता है उसके अंदर देव रूपी अच्छे विचार का वास हो जाता है। उक्त बातें क्षेत्र के ग्राम सभा सबेली में अरविंद कुमार मिश्र के आवास पर चल रहे श्रीमदभागवत कथा के चतुर्थ दिवस की कथा में आचार्य पंडित सौरभ सुमन जी महाराज ने कहा। कथा व्यास ने आगे कहा कि हमारे अंदर अच्छाई बुराई प्रारब्ध अनुसार आती जाती रहती हैं ध्रुव प्रहलाद के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए यह बताया भगवत प्राप्ति के लिए मानव शरीर मिला है ध्रुव और प्रहलाद की तरह सच्ची प्रीति और विश्वास केवल पर 5 वर्ष में ही भक्ति और भगवान को प्राप्त कर लिए प्रहलाद जी परम भागवत कह गए लेकिन ध्रुव का नाम नहीं आया क्योंकि ध्रुव के जीवन में सत्संग नहीं था सत्संग इसके विपरीत प्रहलाद को माता के गर्भ में रहने पर ही नारद का सत्संग मिला और द्वादश भागवत में उनका नाम आ गया जीवन में सत्संग के बाद भगवत प्राप्ति सर्वश्रेष्ठ कही गई है अजामिल की कथा से प्रत्येक जीव अजामिल है जो माया में डूबा हुआ हो ऐसे जीव का एकमात्र सहारा भगवान नाम स्मरण अच्छे बुरे विचारों का द्वंद ही देवा सुर संग्राम है हमारे अंदर अच्छाई बुराई प्रारब्ध अनुसार आती जाती रहती हैं और उन्होंने समुद्र मंथन की कथा में बताया कि अच्छाई बुराई पाप पुण्य सुख दुख मान अपमान का विष पीने के बाद ही भागवत आनंद रूपी अमृत प्राप्त होता है जब भगवान के भक्त भी अपने दान का पुण्य का शक्ति का अहंकार कर लेते हैं तब भगवान पृथ्वी पर आकर अपने भक्तों के अहंकार को दूर करते हैं जैसे राजाबलि के अहंकार को भगवान ने तीन कदम में नाप कर वामन अवतार धारण किया कश्यप और अदिति के पुत्र के रूप में आए. फिर महाराज जी ने भगवान के चौबीस अवतारों को बताते हुए राम और कृष्ण अवतार की कथा कही भगवान का अवतार विप्र धेनु सुर और संत की रक्षा धर्म की स्थापना दुष्टों का विनाश भक्त भगवान के संगम हेतु होता है।

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