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रिपोर्ट - हिमांशु मिश्रा
बहराइच :-- जनपद के तहसील महसी में प्रशासनिक गतिरोध अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। उपजिलाधिकारी (एसडीएम) आलोक प्रसाद के कथित 'अमर्यादित व्यवहार' और 'जातिवादी मानसिकता' के खिलाफ बार एसोसिएशन महसी के अधिवक्ताओं का धरना प्रदर्शन बुधवार को और अधिक उग्र हो गया। अधिवक्ताओं ने शासन-प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार तहसील तहसील के अधिवक्ताओं का आरोप है कि एसडीएम आलोक प्रसाद की कार्यशैली भेदभावपूर्ण है। अधिवक्ताओं के अनुसार, एसडीएम 'चंदन, टीका और चोटी' रखने वाले वादकारियों को लज्जित कर उन्हें अपमानित करते हैं। अपने चेंबर में फरियादी के साथ गये अधिवक्ता से अमर्यादित व्यवहार करते हैं, अपनी बात कहने गये सवर्ण अधिवक्ता को सुरक्षा कर्मियों से जबरिया बाहर निकालवा देते हैं अधिवक्ताओं का कहना है कि यह न केवल एक व्यक्ति का अपमान है, बल्कि धार्मिक और व्यक्तिगत मान्यताओं पर भी चोट है। इसी विवाद के चलते पिछले तीन महीनों से एसडीएम कोर्ट का बहिष्कार जारी है एसडीएम आलोक प्रसाद के अविलंब हटाने हेतु विगत 28 जनवरी से शुरू हुआ क्रमिक धरना आंदोलन आज बुधवार को लगातार 5वें दिन भी पूर्ण 'कलमबंद हड़ताल' के रूप में जारी रहा।
धरना स्थल पर हुंकार भरते हुए बार एसोसिएशन महसी के अध्यक्ष भारत प्रसाद मिश्र ने स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं का धैर्य अब जवाब दे रहा है। उन्होंने कहा, "हमने एसडीएम के व्यवहार के खिलाफ लिखित शिकायतें दीं, लेकिन प्रशासन ने इसे अनसुना कर दिया। जब तक एसडीएम आलोक प्रसाद को तहसील महसी से हटाया नहीं जाता, तब तक हमारा धरना और प्रदर्शन समाप्त नहीं होगा।"
वहीं, महामंत्री राम कर्ण त्रिपाठी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अधिवक्ता अपनी आवाज शासन तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा, "अगर शासन और जिला प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन तहसील परिसर से निकलकर व्यापक रूप लेगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।"
बार एसोसिएशन महसी के अधिवक्ता एसडीएम आलोक प्रसाद को तत्काल महसी तहसील से हटाया जाने,एसडीएम की कार्यशैली और उनकी 'विशिष्ट मानसिकता' की उच्च स्तरीय जांच कराने। वादकारियों और अधिवक्ताओं के साथ अमर्यादित व्यवहार करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की करने की लगातार मांग कर रहे हैं।
**प्रशासन की चुप्पी बढ़ा रही तनाव**
हैरानी की बात यह है कि महीनों से चल रहे कोर्ट बहिष्कार के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई निर्णायक समाधान नहीं निकाला गया है। अधिवक्ताओं के आक्रोश और तहसील में ठप्प पड़े कामकाज ने स्थानीय जनता की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। फिलहाल, पूरा तहसील परिसर पुलिस की निगरानी में है और अधिवक्ताओं के तेवर देखते हुए टकराव की स्थिति बनी हुई है।

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