श्री अवध डाटकाम 9839627223
सुजानगंज/ जौनपुर :-- संसार में चौरासी लाख योनियों में भ्रमण करने के बाद जीव को मानव शरीर मिलता है। मानव जीवन को सार्थक बनाने के लिए हमें सद्ग्रंथों से ही सही मार्ग मिलता है इसलिए आवश्यक है कि हम सद्ग्रंथों का अध्ययन करें और साथ ही साथ परमपिता परमेश्वर का चिंतन करें। उक्त उद्गार अयोध्या से पधारे आनंद भूषण जी महाराज ने सका पुर निवासी जयप्रकाश पांडे के आवास पर चल रही भागवत कथा में व्यक्त किया ।उन्होंने कथा के प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए विदुर चरित्र कपिल देव हुति संवाद ध्रुव चरित्र पृथु चरित्र एवं अजामिल उपाख्यान की कथा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि जो भी जीव निष्छल भाव से परमात्मा को ध्यान करता है , भगवान की भक्ति करता है। भगवान उस जीव की रक्षा करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
कथा प्रारंभ से पूर्व मुख्य यजमान ने मंचासीन कथा व्यास आनन्द भूषण जी महराज जी का माल्यार्पण कर पूजन किया।

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