सुजानगंज/ जौनपुर :-- रामचरित मानस में राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न का प्रेम सुखमय पारिवारिक जीवन का एक उदाहरण है। भरत का जो आदर्श चरित्र है उसका वर्णन करना संभव नहीं है ।संक्षेप में अगर कहा जाए तो भरत राम के प्रेम की प्रति मूर्ति है। उक्त उद्गार भिखारीपुर कला में चल रही श्री राम कथा में कथा व्यास प्रकाश चंद विद्यार्थी ने शुक्रवार देर शाम व्यक्त किया ।भरत के चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भरत और राम के प्रेम को ब्रह्मा विष्णु महेश यहां तक की माता सरस्वती भी वर्णन नहीं कर सकती हैं। अगर देखा जाए तो इस समग्र सृष्टि में भरत की महिमा को प्रभु श्री राम के अतिरिक्त अन्य कोई जान ही नहीं पाया है। भरत की महिमा को राम जानते तो हैं लेकिन भरत के महिमा का वर्णन वह स्वयं भी नहीं कर सकते हैं। भरत महा महिमा सुनु रानी,जानहि राम न सकहि बखानी।इस अवसर पर हरगोविंद तिवारी श्री धर तिवारी हंसराज तिवारी सत्य भूषण तिवारी प्रहलाद तिवारी आदि की उपस्थिति उल्लेखनी रही।

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