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राजस्थान सरकार और ग्रासरूट मीडिया फाउंडेशन द्वारा विजयदान देथा साहित्योत्सव 2025 जवाहर कला केंद्र जयपुर में आयोजित हुआ।  21 से 23 मार्च तक आयोजित इस कार्यक्रम में राजस्थानी भाषा और साहित्य के आयामों पर विभिन्न सत्र आयोजित हुए। प्रसंग में  22 मार्च को रहे रानी लक्ष्मी कुमारी चुंडावत सत्र में 'राजस्थानी भासा मांय महिला लेखन री कूंत' विषय पर राज्य भर की वरिष्ठ लेखिकाओं ने अपने विचार रखे। कोटा की ममता महक (राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी बीकानेर की समिति सदस्य) ने हाड़ौती का प्रतिनिधित्व किया। राजस्थानी साहित्य में समीक्षा पर महत्त्वपूर्ण कार्य कर रही एकमात्र लेखिका ममता महक ने समीक्षा के महत्त्वपूर्ण बिंदुओं और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। महक ने कहा कि समीक्षा पुस्तक की होनी चाहिए न कि लेखक की। समीक्षक को किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह से दूर रहना ही चाहिए। किसी भी लेखक की पहली पुस्तक की समीक्षा में हौसला अफ़ज़ाई होने से उसका लेखन के प्रति लगाव बढ़ता है और यही भाषा के विस्तार की ओर पहला कदम है।

इस सत्र में यह बात निकल कर आयी कि राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान मिले, जिससे भाषा और संस्कृति का विकास संभव हो सकेगा। अकादमिक स्तर पर शोध का कार्य प्रगति पकड़े। शेखावाटी की शारदा कृष्ण ने कहा कि मीरा ने जिस राजस्थानी भाषा में काव्य रचा, वह भाषा कमजोर नहीं हो सकती। महियसी मीरा द्वारा लगाए भाषा के पौधे को मान्यता के माध्यम से जीवित रखा जा सकता हे। 

    इस सत्र में किरण राजपुरोहित, डॉ. रेखा खेराड़ी ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर डॉ. नन्दकिशोर महावर, डॉ . सुरेश साल्वी, विजय जोशी, डॉ. रेणु श्रीवास्तव, जीतेन्द्र निर्मोही, देवकी दर्पण, योगिराज योगी, विष्णु शर्मा 

हरिहर, जयसिंह आशावत, हरप्रीत सिंह, चौथमल प्रजापत आदि उपस्थित रहे।